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कब्जे छुड़वाने के लिए अब तालाबों का होगा डिजीटल सर्वे
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण फिजिकल सर्वे के बाद अब हरसेक (हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र) के साथ मिलकर तालाबों का डिजिटल सर्वे कराएगा। इससे प्राधिकरण के पास तालाबों पर किए गए कब्जों की सटीक जानकारी पहुंचेगी। सबसे पहले प्राधिकरण ने कच्चे कब्जे हटवाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। डीसी के माध्यम से सभी जिलों में कब्जाधारियों को नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बाद पक्के कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें राजस्व विभाग के रिकार्ड समेत अन्य दस्तावेज जांचे जाएंगे। बता दें कि हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र हाई रेज्यूलेशन सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से सर्वे करता है और इसमें चित्र समेत सटीक जानकारी मिल पाती है। संभावना है कि आगामी कुछ माह में यह सर्वे पूरा हो जाएगा और इसके बाद से प्राधिकरण तालाबों को कब्जा मुक्त करने का अभियान चलाएगा।
प्रदेश में हैं 18113 तालाब
प्रदेश में 18113 तालाब हैं। इनमें से गांवों में 17434 और शहरी क्षेत्र में 679 तालाब हैं। 600 तालाब ऐतिहासिक और 597 धर्म की आस्था से जुड़े हैं। प्रदूषित और ओवरफ्लो तालाब 1970 हैं। 9836 तालाब ऐसे हैं जो प्रदूषित हैं, लेकिन ओवरफ्लो नहीं हैं। साफ तालाब 4645 हैं। इनमें ग्रामीण एरिया 4598, शङरी 87 हैं। इसी प्रकार, प्रदेश में कुल सूखे तालाब 1578 हैं। इनमें से 1364 ग्रामीण और 214 शहरी क्षेत्र में हैं। सर्वे के अनुसार, पशुओं के तालाब 12042 हैं। इनमें ग्रामीण एरिया में 11799 और शहरी क्षेत्र में 243 तालाब हैं। 533 सिंचाई के तालाब हैं और 3156 प्रदूषित तालाब हैं, जो डंप पड़े हैं और प्रयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। कुल 4040 तालाब नहरों से जुड़े हैं, जबकि 7709 तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है।
तालाबों को विकसित कराने में सहयोग दें ग्रामीण : शर्मा
तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकारण के तकनीकी सलाहकार हरिप्रकाश शर्मा ने बताया कि हरसेक के माध्यम से तालाबों का डिजिटल सर्वे कराया जाएगा। तालाबों के सौंदर्यीकरण से गांवों के लोगों को ही लाभ है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे इस अभियान में आगे आएं और अपने गांव के तालाबों का जीर्णोद्घार कराएं। प्राधिकरण का प्रयास है कि तालाबों के दूषित पानी को न केवल खेती के लिए प्रयोग किया जा सके, बल्कि इनको सैर करने के लिए स्थल की तरह बनाया जाए। अवैध कब्जे हटवाने के लिए संबंधित जिलों के डीसी के माध्यम से नोटिस भेजे जाएंगे।
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चंडीगढ़। तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण फिजिकल सर्वे के बाद अब हरसेक (हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र) के साथ मिलकर तालाबों का डिजिटल सर्वे कराएगा। इससे प्राधिकरण के पास तालाबों पर किए गए कब्जों की सटीक जानकारी पहुंचेगी। सबसे पहले प्राधिकरण ने कच्चे कब्जे हटवाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। डीसी के माध्यम से सभी जिलों में कब्जाधारियों को नोटिस भेजे जाएंगे। इसके बाद पक्के कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें राजस्व विभाग के रिकार्ड समेत अन्य दस्तावेज जांचे जाएंगे। बता दें कि हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र हाई रेज्यूलेशन सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से सर्वे करता है और इसमें चित्र समेत सटीक जानकारी मिल पाती है। संभावना है कि आगामी कुछ माह में यह सर्वे पूरा हो जाएगा और इसके बाद से प्राधिकरण तालाबों को कब्जा मुक्त करने का अभियान चलाएगा।
प्रदेश में हैं 18113 तालाब
प्रदेश में 18113 तालाब हैं। इनमें से गांवों में 17434 और शहरी क्षेत्र में 679 तालाब हैं। 600 तालाब ऐतिहासिक और 597 धर्म की आस्था से जुड़े हैं। प्रदूषित और ओवरफ्लो तालाब 1970 हैं। 9836 तालाब ऐसे हैं जो प्रदूषित हैं, लेकिन ओवरफ्लो नहीं हैं। साफ तालाब 4645 हैं। इनमें ग्रामीण एरिया 4598, शङरी 87 हैं। इसी प्रकार, प्रदेश में कुल सूखे तालाब 1578 हैं। इनमें से 1364 ग्रामीण और 214 शहरी क्षेत्र में हैं। सर्वे के अनुसार, पशुओं के तालाब 12042 हैं। इनमें ग्रामीण एरिया में 11799 और शहरी क्षेत्र में 243 तालाब हैं। 533 सिंचाई के तालाब हैं और 3156 प्रदूषित तालाब हैं, जो डंप पड़े हैं और प्रयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। कुल 4040 तालाब नहरों से जुड़े हैं, जबकि 7709 तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है।
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तालाबों को विकसित कराने में सहयोग दें ग्रामीण : शर्मा
तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकारण के तकनीकी सलाहकार हरिप्रकाश शर्मा ने बताया कि हरसेक के माध्यम से तालाबों का डिजिटल सर्वे कराया जाएगा। तालाबों के सौंदर्यीकरण से गांवों के लोगों को ही लाभ है। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे इस अभियान में आगे आएं और अपने गांव के तालाबों का जीर्णोद्घार कराएं। प्राधिकरण का प्रयास है कि तालाबों के दूषित पानी को न केवल खेती के लिए प्रयोग किया जा सके, बल्कि इनको सैर करने के लिए स्थल की तरह बनाया जाए। अवैध कब्जे हटवाने के लिए संबंधित जिलों के डीसी के माध्यम से नोटिस भेजे जाएंगे।
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