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शिवालिक की बंजर धरती पर खिलेगा 'ड्रैगन': वैज्ञानिकों का दावा-कम पानी में भी सफल होगी ड्रैगन फल की खेती
Tue, 24 Feb 2026 03:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 24 Feb 2026 03:24 PM IST
सार
ड्रैगन फल, जिसे ड्रैगन मोतीफल या पिताया भी कहा जाता है। इसे अमेरिका, चीन, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। भारत में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में इसकी खेती शुरू हो गई है।
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ड्रैगन फ्रूट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अब शिवालिक की बंजर जमीन पर भी ड्रैगन फल खिलेगा। इसका खुलासा भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान केंद्र की रिसर्च में हुआ है। यह रिसर्च तीन साल में पूरा होगा। पंचकूला के माता मनसा देवी क्षेत्र में स्थित केंद्र के रिसर्च फार्म में 0.3 हेक्टेयर में सितंबर 2024 में ड्रैगन फल की खेती की गई थी।
ड्रैगन फल का पौधा सामान्यतः 12 माह में फल देने लगता है लेकिन बेहतर ग्रोथ के लिए 18 माह का समय उचित है। वहां अब फल निकलने लगे हैं। आगामी तीन साल में रिसर्च के आधार पर किसान हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली के शिवालिक क्षेत्र में भी इसकी खेती कर लाखों कमा सकते हैं।
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ड्रैगन फल का पौधा सामान्यतः 12 माह में फल देने लगता है लेकिन बेहतर ग्रोथ के लिए 18 माह का समय उचित है। वहां अब फल निकलने लगे हैं। आगामी तीन साल में रिसर्च के आधार पर किसान हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली के शिवालिक क्षेत्र में भी इसकी खेती कर लाखों कमा सकते हैं।
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कम पानी में होगा तैयार, लंबे समय तक उपज
ड्रैगन फल की बाजार में मांग बढ़ी है। इसकी खेती कम पानी में तैयार हो जाती है और देखरेख भी अधिक नहीं है। एक बार तैयार होने के बाद पौधा 20 से 22 साल तक नियमित उपज देता है। फल उत्पादन शुरू होने के बाद किसान प्रति एकड़ प्रतिवर्ष करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं।पैदावार की होगी जांच
पथरीले एरिया में ड्रैगन की खेती के बाद पहले पैदावार की हर एंगल से जांच की जाएगी। इसमें फल की क्वालिटी, पैदावार की मात्रा और किसी बीमारी का होना शामिल है। ड्रैगन फल की खेती के लिए तेज धूप की जरूरत नहीं होती।पौधा आकर्षक और फल स्वाद से भरपूर
आईसीआर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि ड्रैगन एक पौराणिक फल है। इसका तना बेल जैसी लंबाई का होता है और इसे पर्याप्त जगह की जरूरत होती है। प्रत्येक पौधे पर आरसीसी सर्कुलर रिंग के जरिए एमडीसी के रिसर्च सेंटर में चार पौधे लगाए गए हैं। एक आरसीसी रिंग की कीमत करीब 800 रुपये है। इसकी ऊंचाई साढ़े छह फीट और चौड़ाई 4-6 इंच है। पौधा सुगंधित, आकर्षक और स्वादिष्ट फल देता है।
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