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Panchkula News: एआई से होगी अब अपराधियों की पहचान, पंचकूला पुलिस बनी हाईटेक

Wed, 18 Jun 2025 12:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jun 2025 12:29 AM IST
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Now criminals will be identified through AI, Panchkula police becomes hi-tech
पंचकूला। जिला पुलिस ने अब अपराधियों की धरपकड़ के लिए तकनीक का सहारा लेते हुए अपनी कार्यशैली को और अधिक हाईटेक बना लिया है। अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए पुलिस अब इंटरनेट पर ओपन सोर्स एआई एप्लिकेशन और फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी। इससे अपराधी की पहचान कर धरपकड़ करने की राह आसान होगी। साथ ही इन तकनीकों के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर संदिग्धों की गतिविधियों पर नज़र रखी जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी मकसद को चलते मंगलवार को पंचकूला डीसीपी क्राइम अमित दहिया की अध्यक्षता में सेक्टर-1 पंचकूला स्थित डीसी ऑफिस के कॉन्फ्रेंस हाल में एक महत्वपूर्ण वर्कशाॅप आयोजित की गई। इसमें विभिन्न शाखाओं के कर्मचारियों व जांच अधिकारियों को आधुनिक वेब पोर्टल और ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप्स के माध्यम से पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाने पर विस्तृत जानकारी दी गई।
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इस दौरान डीसीपी क्राइम ने वीडियो प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग कर पुलिस न केवल अपराधियों तक कम समय में पहुंच सकती है, बल्कि अपनी कार्यप्रणाली को भी अधिक व्यवस्थित और बेहतर बना सकती है। उन्होंने बताया कि मौजूदा डिजिटल युग में पुलिस को तकनीकी रूप से निपुण होना अत्यंत आवश्यक है, जिससे अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
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एनालिटिक्स ट्रेनिंग दी गई
पंचकूला डीसपी क्राइम अमित दहिया ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा साइबर अपराधों की तेजी से जांच और विश्लेषण के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष एनालिटिक्स ट्रेनिंग दी गई है। इस प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को लगभग 20 ओपन सोर्स टूल्स की जानकारी दी गई तथा उन्हें मोबाइल और लैपटॉप पर तकनीकी प्रशिक्षण देकर डेमो के माध्यम से इन टूल्स के प्रयोग की विधि भी समझाई गई। इसका उद्देश्य यह है कि जब किसी केस की जांच के दौरान डिजिटल उपकरणों की आवश्यकता हो तो संबंधित पुलिसकर्मी उसका कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
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डीसीपी क्राइम ने जनता को सतर्क करते हुए कहा कि किसी के कहने पर रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन जैसे क्विक सपोर्ट, एनी डेस्क, टीम व्यूअर, एयर ड्रेायेड को प्ले स्टोर से डाउनलोड न करें और ना ही किसी को इनके पासवर्ड साझा करें। ये ऐप्स साइबर अपराधियों के लिए संवेदनशील जानकारी हासिल करने का माध्यम बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त फेसबुक, मैसेंजर, व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किसी भी संदिग्ध लिंक या पैसों की मांग पर तुरंत विश्वास न करें। किसी भी ट्रांजेक्शन से पहले व्यक्ति से फोन या प्रत्यक्ष मिलकर पुष्टि अवश्य करें। डीसीपी क्राइम ने पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आमजन को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए ‘एम-कवच’ मोबाइल एप के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह ऐप स्मार्टफोन यूजर्स के लिए एक व्यापक सुरक्षा उपाय है, जो डिवाइस को हैकिंग और मेलवेयर अटैक से सुरक्षित रखने में मदद करता है। एम-कवच अनधिकृत पहुंच को रोकते हुए वाई-फाई, ब्लूटूथ, कैमरा और मोबाइल डेटा के दुरुपयोग की चेतावनी देता है।

डीसीपी क्राइम ने संचार साथी ऐप की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसके माध्यम से खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट को ब्लॉक किया जा सकता है, जिससे वे किसी भी नेटवर्क पर इस्तेमाल नहीं हो सकते। साथ ही यह ऐप यह भी बताता है कि आपके नाम पर कितने मोबाइल सिम कार्ड पंजीकृत हैं और यदि कोई व्यक्ति अनधिकृत रूप से सिम का उपयोग कर रहा है, तो आप टफकॉप पोर्टल के जरिये पता लगा सकते है उसकी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।
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