किसान नेताओं की मुश्किलें बढ़ीं: अब भाकियू लक्खोवाल ने चुनाव लड़ने से किया इनकार, कहा-किसी राजनीतिक दल को नहीं देंगे समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) से जुड़ी 22 जत्थेबंदियों ने 25 दिसंबर को संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन कर पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था। हालांकि एसकेएम ने इस पर 15 जनवरी को बैठक बुलाई है। उसी में इन 22 संगठनों पर अगला निर्णय किया जाएगा।
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पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे किसानों की राह अब जुदा होने लगी है। अब भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) ने चुनाव लड़ने से किनारा कर लिया है। यूनियन प्रधान अजमेर सिंह लक्खोवाल ने कहा है कि वह न ही चुनाव लड़ेंगे और न ही किसी का समर्थन करेंगे। लक्खोवाल ने कहा है कि अब भी किसानों की कई मांगें रुकी हुईं हैं। सियासी राह पकड़ने से उनकी मांगों की राह मुश्किल हो सकती है।
किसान संगठनों के राजनीतिक दल को समर्थन नहीं
किसान यूनियन ने घोषणा की है कि वह चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को नहीं खड़ा करेंगे और न ही किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे। यूनियन के नेता अजमेर सिंह लक्खोवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह 2022 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही किसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे। हालांकि कुछ किसान संगठनों ने एक राजनीतिक दल बनाया है, लेकिन उन्होंने राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया।
कर्ज माफी का मुद्दा अभी अधूरा
लक्खोवाल ने कहा कि किसानों की अभी मांगें अधूरी हैं, कई मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। किसानों की कर्ज माफी या शहीद किसानों के स्मारक स्थल आदि जैसे मुद्दे अभी अधूरे पड़े हैं। जल्द ही किसान नेता राकेश टिकैत पंजाब का दौरा करेंगे और कई मुद्दों पर चर्चा होगी। वे किसानों के मुद्दों को उठाएंगे और संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार चुनाव से दूर रहेंगे। उनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। पंजाब के 22 संगठनों ने साझा समाज मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने का एलान किया है। कुछ किसान संगठन इस फैसले के खिलाफ हैं।
भाकियू एकता (डकौंदा) और कीरती किसान यूनियन पहले कर चुके हैं इनकार
गुरुवार को कीरती किसान यूनियन ने भी चुनाव से दूर रहने का एलान किया था। इससे पहले भारतीय किसान यूनियन-एकता (डकौंदा) ने चुनाव में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। यूनियन के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने यह एलान किया था कि उनकी जत्थेबंदी किसी भी पार्टी या धड़े का समर्थन नहीं करेगी।
किसान संघर्ष मोर्चा (एसकेएम) से जुड़ी 22 जत्थेबंदियों ने 25 दिसंबर को संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन कर पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था। उस समय यह भी कहा गया था कि तीन अन्य जत्थेबंदियां भी जल्द ही एसएसएम से जुड़ेंगी, लेकिन भाकियू-एकता (डकौंदा) ने संयुक्त समाज मोर्चे का समर्थन नहीं करने का फैसला किया था