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Panchkula News: पर्ल ग्रुप की जमीन की रजिस्ट्री मामले में पूर्व तहसीलदार को राहत नहीं, अग्रिम जमानत खारिज
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श्याम ज्वेलर्स के खाते में भेजे गए 5.54 करोड़ रुपये से अधिक, सोना खरीदने का दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पर्ल ग्रुप की प्रतिबंधित जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री से जुड़े मामले में पूर्व तहसीलदार जोगिंदर शर्मा को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन की बिक्री से प्राप्त रकम का इस्तेमाल श्याम ज्वेलर्स के माध्यम से सोना खरीदने में किया गया। इसके लिए 5.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आरटीजीएस के जरिए भेजे जाने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, जोगिंदर शर्मा ने खरीदे गए सोने की डिलीवरी भी ली थी। अदालत के आदेश के मुताबिक, पर्ल ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए अटैच की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत इनकी बिक्री और हस्तांतरण पर रोक थी। इसके बावजूद रायपुररानी के शाहपुर और रायपुररानी गांवों में करीब 17.55 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री 19 दिसंबर 2025 को निजी खरीदारों के नाम कर दी गई। दस्तावेजों में जमीन का मूल्य 7.87 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज है।
विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, पटवारी नरेंद्र डबास, कानूनगो दीपक कुमार और जोगिंदर शर्मा की कथित भूमिका सामने आई है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जमीन से प्रतिबंध हटवाने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर मिलकर काम किया। जांच के अनुसार, जमीन की बिक्री से जुड़े खाते में करीब 6.18 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इनमें से 1.20 करोड़ रुपये रियल्टर्स एंड कंसल्टेंट्स के खाते में ट्रांसफर किए गए। सरकारी पक्ष ने बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के लिए शर्मा से हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पर्ल ग्रुप की प्रतिबंधित जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री से जुड़े मामले में पूर्व तहसीलदार जोगिंदर शर्मा को जिला अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन की बिक्री से प्राप्त रकम का इस्तेमाल श्याम ज्वेलर्स के माध्यम से सोना खरीदने में किया गया। इसके लिए 5.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आरटीजीएस के जरिए भेजे जाने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, जोगिंदर शर्मा ने खरीदे गए सोने की डिलीवरी भी ली थी। अदालत के आदेश के मुताबिक, पर्ल ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए अटैच की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत इनकी बिक्री और हस्तांतरण पर रोक थी। इसके बावजूद रायपुररानी के शाहपुर और रायपुररानी गांवों में करीब 17.55 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री 19 दिसंबर 2025 को निजी खरीदारों के नाम कर दी गई। दस्तावेजों में जमीन का मूल्य 7.87 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज है।
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विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, पटवारी नरेंद्र डबास, कानूनगो दीपक कुमार और जोगिंदर शर्मा की कथित भूमिका सामने आई है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जमीन से प्रतिबंध हटवाने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर मिलकर काम किया। जांच के अनुसार, जमीन की बिक्री से जुड़े खाते में करीब 6.18 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इनमें से 1.20 करोड़ रुपये रियल्टर्स एंड कंसल्टेंट्स के खाते में ट्रांसफर किए गए। सरकारी पक्ष ने बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के लिए शर्मा से हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया।
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