{"_id":"69a34ce66ebebfcf7b0c5c85","slug":"no-criminal-case-can-be-made-against-the-family-in-a-rape-case-on-the-pretext-of-marriage-high-court-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-960400-2026-03-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म मामले में परिवार पर नहीं बनता आपराधिक मामला : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म मामले में परिवार पर नहीं बनता आपराधिक मामला : हाईकोर्ट
विज्ञापन
चंडीगढ़। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी युवक के माता-पिता और दादी को अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब करने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल विवाह का आश्वासन देने या उसका समर्थन करने मात्र से दुष्कर्म जैसे अपराध में परिवार के सदस्यों की आपराधिक संलिप्तता स्वतः स्थापित नहीं होती।
जस्टिस शालिनी नागपाल की पीठ ने अमृतसर निवासी महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश तार्किक और विधिसम्मत है तथा उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। पीड़िता का आरोप था कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। युवक के माता-पिता और दादी ने भी विवाह का आश्वासन दिया था और इस प्रकार उन्होंने युवक के कथित झूठे वादे को बढ़ावा दिया।
जांच के बाद पुलिस ने केवल युवक के खिलाफ ही चालान पेश किया। इसके बाद महिला ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर कर युवक के परिवार के सदस्यों को भी आरोपी के रूप में तलब करने की मांग की। 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने यह आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंध अभियोजिका और मुख्य आरोपी के बीच थे। माता-पिता और दादी द्वारा दिए गए कथित आश्वासन को किसी भी प्रकार से ऐसा कृत्य नहीं माना जा सकता जिससे उनके विरुद्ध दुष्कर्म या अन्य अपराध का संज्ञान लिया जाए। न्यायमूर्ति नागपाल ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त व्यक्तियों को आरोपी के रूप में तलब करने की शक्ति विवेकाधीन और असाधारण है।
विज्ञापन
जस्टिस शालिनी नागपाल की पीठ ने अमृतसर निवासी महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश तार्किक और विधिसम्मत है तथा उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। पीड़िता का आरोप था कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। युवक के माता-पिता और दादी ने भी विवाह का आश्वासन दिया था और इस प्रकार उन्होंने युवक के कथित झूठे वादे को बढ़ावा दिया।
विज्ञापन
जांच के बाद पुलिस ने केवल युवक के खिलाफ ही चालान पेश किया। इसके बाद महिला ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर कर युवक के परिवार के सदस्यों को भी आरोपी के रूप में तलब करने की मांग की। 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने यह आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंध अभियोजिका और मुख्य आरोपी के बीच थे। माता-पिता और दादी द्वारा दिए गए कथित आश्वासन को किसी भी प्रकार से ऐसा कृत्य नहीं माना जा सकता जिससे उनके विरुद्ध दुष्कर्म या अन्य अपराध का संज्ञान लिया जाए। न्यायमूर्ति नागपाल ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त व्यक्तियों को आरोपी के रूप में तलब करने की शक्ति विवेकाधीन और असाधारण है।