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Panchkula News: अबोहर–फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ा करते हुए काटे गए वृक्षों के बदले नहीं हुई प्रतिपूर्ति

Fri, 30 Jan 2026 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:16 AM IST
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No compensation for trees felled during the widening of the Abohar-Fazilka National Highway
चंडीगढ़। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे अबोहर–फाजिल्का राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए काटे गए वृक्षों के लिए सही प्रतिपूर्ति मानसून में करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह परियोजना भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हो लेकिन इससे जुड़े पर्यावरणीय दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।
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अदालत के समक्ष बताया गया कि लगभग 100 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर करीब 14,000 पेड़ प्रभावित हुए थे जबकि कानून के अनुसार इसके बदले कम से कम पांच गुना यानी 70,000 पौधे लगाए जाने चाहिए थे। एनएचएआई की ओर से यह स्वीकार किया गया कि अब तक केवल 63,000 पौधे ही लगाए गए हैं, जो निर्धारित मानक से कम हैं।
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राजमार्ग से सटे जिन क्षेत्रों में पौधरोपण किया गया वह भूमि अब एनएचएआई से पंजाब सरकार को हस्तांतरित कर दी गई है और उसे संरक्षित वन घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिपूरक पौधरोपण की संख्या अभी भी वैधानिक आवश्यकता से कम है और इस कमी को मानसून के दौरान पूरा करना अनिवार्य होगा, क्योंकि इसी मौसम में पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।
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एनएचएआई ने काटे गए वृक्षों की प्रतिपूर्ति के लिए 10 गुना पौधरोपण की शर्त को चुनौती देते हुए कहा था कि यह शर्त कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। इसे केवल तीन विशेष परिस्थितियों में ही लागू किया जा सकता है जब एक हेक्टेयर तक वन भूमि का विचलन हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान परियोजना में 63.087 हेक्टेयर वन भूमि के बदले समकक्ष भूमि पहले ही सरकार को दी जा चुकी है। एनएचएआई ने कहा कि यदि और पौधरोपण करना पड़ा तो नई भूमि का अधिग्रहण करना पड़ेगा। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या आपसे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि आप कुछ और कदम आगे बढ़ाएं? पर्यावरण के लिहाज से हम एक बेहद नाजुक दौर में हैं।
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