{"_id":"60204acd8ebc3e74a60360ab","slug":"new-sugar-mills-of-karnal-and-panipat-will-be-operational-from-next-season-panchkula-news-pkl403237525","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगले सीजन से चालू हो जाएंगी करनाल और पानीपत की नई शुगर मिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगले सीजन से चालू हो जाएंगी करनाल और पानीपत की नई शुगर मिलें
विज्ञापन
चंडीगढ़। प्रदेश के गन्ना उत्पादकों के लए राहत की खबर है। वर्षों से लंबित मांग अब पूरी वाली है। करीब 650 करोड़ की लागत से तैयार पानीपत और करनाल की नई शुगर मिलें अगले गन्ना सीजन से चालू हो जाएंगी। दोनों का निर्माण और मशीनों के स्थापित करने का कार्य अंतिम चरण में है।
शुगरफेड के अधिकारियों का दावा है कि इसी सीजन के अंत तक (अप्रैल माह में) इनका ट्रायल किया जाएगा, ताकि कोई खामी हो तो उसे दूर कर लिया जाएगा। दोनों परियोजनाओं के चालू होने से आसपास के लाखों गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा, क्योंकि दोनों मिलों की न केवल क्षमता बढ़ाई गई है, बल्कि मशीनें भी आधुनिक हैं।
करनाल में मेरठ रोड चीनी मिल परिसर में 263 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई चीनी मिल का काम लगभग पूरा होने वाला है। आधुनिक मशीनरी से युक्त नई मिल प्रतिदिन 3500 टन गन्ने की पिराई करेगा, जबकि 5000 तक क्षमता बढ़ाने का प्रावधान है। पुरानी मिल की पिराई की क्षमता 1800 टन प्रतिदिन की है। यहां पर टरबाइन जेनरेटर भी लगाए गए हैं, जिससे 18 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जो सहकारी चीनी मिल की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बिजली निगम को भी बिजली सप्लाई की जा सकेगी। वहीं, शाहाबाद स्थित शुगर मिल में 99 करोड़ रुपये की लागत से एथनाल प्लांट तैयार किया गया है। यह भी जल्द ही काम करना शुरू कर देगा।
विज्ञापन
पानीपत में नई शुगर मिल पर करीब 306 करोड़ रुपये खर्च आया है। डिस्टलरी शिफ्ट करने का बजट भी करीब 78 करोड़ रुपये का है। इस हिसाब से पूरे प्लांट की शिफ्टिंग पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां भी काम लगभग पूरा होने वाला है। यह अपनी तरह की यह पहली मिल है, जिससे प्रदूषण नहीं निकलेगा। इसलिए, शहरवासियों को अप्रैल से बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि अप्रैल से पुरानी मिल बंद हो जाएगी। अप्रैल में नई मिल का ट्रायल होगा। पहले मिल की एक सीजन में क्षमता 30 लाख क्विंटल पेराई की है, जबकि नई मिल की क्षमता 75 लाख क्विंटल तक होगी।
दोनों मिलों को लेकर भारतीय किसान यूनियन समेत अन्य किसान संगठन आंदोलन करते रहे हैं। ये दोनों मिलें करीब 30 से 35 साल पुरानी हो चुकी थीं। किसानों को हर साल यहां पर ब्रेकडाउन के कारण दिक्कतें झेलनी पड रह़ी थीं। नई मिल चालू होने से किसानों का बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नई मशीन होने के कारण चीनी की रिकवरी दर बढ़ेगी, इससे मिलों का घाटा पूरा होगा। गन्ने के छिलके से बिजली तैयार करने से भी मिल को बिजली सुचारू करने में मदद मिलेगी।
अगले सीजन तक चालू हो जाएंगी दोनों मिलें
पानीपत और करनाल में नई शुगर मिल स्थापित करने का कार्य अंतिम चरण में है। हमारा प्रयास है कि इस सीजन के अंत तक इन दोनों का ट्रायल किया जाए, ताकि कोई भी दिक्कत हो तो उसे अगले सीजन तक दूर कर लिया जाए। अगले गन्ना सीजन तक ये दोनों नई मिलें चालू हो जाएंगी और इससे आसपास के किसानों का लाभ मिलेगा।
-कैप्टन शक्ति सिंह, एमडी, शुगरफेड
विज्ञापन
शुगरफेड के अधिकारियों का दावा है कि इसी सीजन के अंत तक (अप्रैल माह में) इनका ट्रायल किया जाएगा, ताकि कोई खामी हो तो उसे दूर कर लिया जाएगा। दोनों परियोजनाओं के चालू होने से आसपास के लाखों गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा, क्योंकि दोनों मिलों की न केवल क्षमता बढ़ाई गई है, बल्कि मशीनें भी आधुनिक हैं।
विज्ञापन
करनाल में मेरठ रोड चीनी मिल परिसर में 263 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई चीनी मिल का काम लगभग पूरा होने वाला है। आधुनिक मशीनरी से युक्त नई मिल प्रतिदिन 3500 टन गन्ने की पिराई करेगा, जबकि 5000 तक क्षमता बढ़ाने का प्रावधान है। पुरानी मिल की पिराई की क्षमता 1800 टन प्रतिदिन की है। यहां पर टरबाइन जेनरेटर भी लगाए गए हैं, जिससे 18 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जो सहकारी चीनी मिल की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बिजली निगम को भी बिजली सप्लाई की जा सकेगी। वहीं, शाहाबाद स्थित शुगर मिल में 99 करोड़ रुपये की लागत से एथनाल प्लांट तैयार किया गया है। यह भी जल्द ही काम करना शुरू कर देगा।
विज्ञापन
पानीपत में नई शुगर मिल पर करीब 306 करोड़ रुपये खर्च आया है। डिस्टलरी शिफ्ट करने का बजट भी करीब 78 करोड़ रुपये का है। इस हिसाब से पूरे प्लांट की शिफ्टिंग पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यहां भी काम लगभग पूरा होने वाला है। यह अपनी तरह की यह पहली मिल है, जिससे प्रदूषण नहीं निकलेगा। इसलिए, शहरवासियों को अप्रैल से बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि अप्रैल से पुरानी मिल बंद हो जाएगी। अप्रैल में नई मिल का ट्रायल होगा। पहले मिल की एक सीजन में क्षमता 30 लाख क्विंटल पेराई की है, जबकि नई मिल की क्षमता 75 लाख क्विंटल तक होगी।
दोनों मिलों को लेकर भारतीय किसान यूनियन समेत अन्य किसान संगठन आंदोलन करते रहे हैं। ये दोनों मिलें करीब 30 से 35 साल पुरानी हो चुकी थीं। किसानों को हर साल यहां पर ब्रेकडाउन के कारण दिक्कतें झेलनी पड रह़ी थीं। नई मिल चालू होने से किसानों का बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नई मशीन होने के कारण चीनी की रिकवरी दर बढ़ेगी, इससे मिलों का घाटा पूरा होगा। गन्ने के छिलके से बिजली तैयार करने से भी मिल को बिजली सुचारू करने में मदद मिलेगी।
अगले सीजन तक चालू हो जाएंगी दोनों मिलें
पानीपत और करनाल में नई शुगर मिल स्थापित करने का कार्य अंतिम चरण में है। हमारा प्रयास है कि इस सीजन के अंत तक इन दोनों का ट्रायल किया जाए, ताकि कोई भी दिक्कत हो तो उसे अगले सीजन तक दूर कर लिया जाए। अगले गन्ना सीजन तक ये दोनों नई मिलें चालू हो जाएंगी और इससे आसपास के किसानों का लाभ मिलेगा।
-कैप्टन शक्ति सिंह, एमडी, शुगरफेड