{"_id":"6ac801c822c1c0fbea06bd94","slug":"neeraj-chaudhary-cleared-of-charges-in-bank-loan-fund-diversion-case-panchkula-news-c-87-1-pan1011-142400-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: बैंक लोन फंड डायवर्जन मामले में नीरज चौधरी आरोप मुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: बैंक लोन फंड डायवर्जन मामले में नीरज चौधरी आरोप मुक्त
विज्ञापन
सीबीआई अदालत ने रिकॉर्ड और दलीलों पर विचार कर खत्म की आपराधिक कार्यवाही
पंचकूला। बैंक लोन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता और फंड डायवर्जन के मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुग्राम निवासी नीरज चौधरी को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने मामले में पेश दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया। नीरज पर बैंक की क्रेडिट सुविधा से रकम के कथित डायवर्जन और दुरुपयोग के आरोप थे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता समीर सेठी और अधिवक्ता यवनीत ढाकला ने दलील दी कि जांच एजेंसी ने जिन लेनदेन को फंड डायवर्जन बताया है उनकी स्थिति बैंक खातों के पूरे लेजर से स्पष्ट नहीं होती। माडर्न प्रिंटिंग कारोबार से जुड़े कैश क्रेडिट और करंट अकाउंट की एक अप्रैल 2013 से 20 जुलाई 2017 तक की एंट्री के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया कि क्रेडिट रकम कथित डेबिट रकम से करीब 54.28 करोड़ रुपये अधिक थी।
बचाव पक्ष ने बताया कि बैंक ने वर्ष 2019 में डीआरटी चंडीगढ़ में रिकवरी की कार्रवाई शुरू की थी। इसके बावजूद छह वर्ष से अधिक समय बाद आपराधिक शिकायत दर्ज की गई। यह भी दलील दी गई कि मामले में कोई जालसाजी सामने नहीं आई।
विज्ञापन
बचाव पक्ष ने कहा कि केवल अनुबंध की शर्त पूरी न होने या भुगतान में चूक को धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। अदालत ने इन दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार कर नीरज चौधरी को आरोप मुक्त कर दिया। उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई।
विज्ञापन
पंचकूला। बैंक लोन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता और फंड डायवर्जन के मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरुग्राम निवासी नीरज चौधरी को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने मामले में पेश दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया। नीरज पर बैंक की क्रेडिट सुविधा से रकम के कथित डायवर्जन और दुरुपयोग के आरोप थे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता समीर सेठी और अधिवक्ता यवनीत ढाकला ने दलील दी कि जांच एजेंसी ने जिन लेनदेन को फंड डायवर्जन बताया है उनकी स्थिति बैंक खातों के पूरे लेजर से स्पष्ट नहीं होती। माडर्न प्रिंटिंग कारोबार से जुड़े कैश क्रेडिट और करंट अकाउंट की एक अप्रैल 2013 से 20 जुलाई 2017 तक की एंट्री के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया कि क्रेडिट रकम कथित डेबिट रकम से करीब 54.28 करोड़ रुपये अधिक थी।
विज्ञापन
बचाव पक्ष ने बताया कि बैंक ने वर्ष 2019 में डीआरटी चंडीगढ़ में रिकवरी की कार्रवाई शुरू की थी। इसके बावजूद छह वर्ष से अधिक समय बाद आपराधिक शिकायत दर्ज की गई। यह भी दलील दी गई कि मामले में कोई जालसाजी सामने नहीं आई।
विज्ञापन
बचाव पक्ष ने कहा कि केवल अनुबंध की शर्त पूरी न होने या भुगतान में चूक को धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। अदालत ने इन दलीलों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार कर नीरज चौधरी को आरोप मुक्त कर दिया। उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई।