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पंचकूला: नक्सली घरों में घुसकर कई दिनों तक जबर्दस्ती रहते हैं, डर के साये में रहते हैं लोग

Sat, 18 Feb 2023 06:52 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2023 06:52 PM IST
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Naxalites forcefully enter houses and stay for many days, people live under the shadow of fear
आदिवासी युवाओं को भाया हरियाणा, बोले- बेखौफ रहते हैं लोग यहां, खानपान और व्यवहार के भी मुरीद हुए प्रवासी युवासंवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। नक्सली लोगों के घरों में जबरदस्ती घुस आते हैं। कई-कई दिन तक वहीं रुकते हैं। उन्हें जो सामान चाहिए होता है, वो उपलब्ध कराना पड़ता है। ऐसा नहीं करो तो फिर अंजाम खौफनाक होता है। यह दर्द झारखंड के खूंटी जिला मुख्यालय के आसपास रहने वाले आदिवासी क्षेत्रों का है। 14वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पांच प्रदेशों के 220 आदिवासी युवा पंचकूला पहुंचे हैं। यहां उन्होंने अपना दर्द साझा किया। पंचकूला का माहौल देखकर वे बहुत खुश हैं, उनका कहना है कि यहां लोग बेखौफ रहते हैं।
युवा रोहित साहू ने बताया कि वहां नक्सली लोगों से गैरकानूनी रूप से अफीम की खेती करवाते हैं। युवाओं को नशे की लत लगाकर और बरगलाकर उनको केवल पांच हजार रुपये महीना देते हैं। लोगों के मन में इतना खौफ भरा है कि वे बाहर से आने वाले लोगों के साथ बात करने से भी डरते हैं।
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शहर जाने के लिए पैदल चलते हैं 8 किलोमीटर
छत्तीसगढ़ के बस्तर निवासी दशमी कश्यम और तुलावती नाग ने बताया कि वे नक्सली क्षेत्र में रहते हैं। जगह-जगह आईटीबीपी के कैंप लगे हैं। अब आतंकवाद से राहत है। शहर जाने के लिए कम से कम 8 किलोमीटर पैदल जाने के बाद कोई वाहन मिलता है। अगर कोई बीमार पड़ जाए तो लोग उसे चारपाई पर डालकर आठ किलोमीटर तक पैदल या बैलगाड़ी में लेकर जाते हैं। उसके बाद ही अस्पताल के लिए वाहन मिलते हैं।
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सिर्फ उत्सवों में ही मिलती है गेहूं की रोटी
छत्तीगढ़ निवासी कामता प्रसाद और मोतीराम तारम ने बताया कि उनके यहां पर मुख्य भोजन चावल ही है। विशेष उत्सव या खुशी के मौके पर ही घर पर गेहूं की रोटी बनाई जाती है। यहां हर रोज खाने में गेहूं की रोटी मिल रही है। कई तरह की सब्जियां मिल रही हैं। हमारे यहां की अपेक्षा हरियाणा में जीवन का अलग ही स्तर है।


कई युवा पहली बार बैठे ट्रेन में
कार्यक्रम में पहुंचे कई युवाओं ने बताया कि वे यहां आने के दौरान पहली बार ट्रेन में बैठे हैं। उससे पहले उन्होंने कभी ट्रेन में बैठकर नहीं देखा। वहीं कई युवा ऐसे भी थे जिन्होंने इससे पहले कभी जिले से या प्रदेश से बाहर जाकर नहीं देखा। यहां लोगों की आवभगत और व्यवहार देखकर सभी युवा गदगद और खुश नजर आए। सभी ने कहा कि वे यहां से हसीन यादें लेकर वापस जाएंगे।
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