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Panchkula News: हिंदू समाज के मार्गदर्शक और प्राचीन संगला वाला के महंत नारायण पुरी का निधन, शिवाला में ही दी गई समाधि

Mon, 13 Oct 2025 10:00 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Updated Mon, 13 Oct 2025 10:00 PM IST
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Narayan Puri, a prominent Hindu leader and Mahant of the ancient Sanglawala temple, passed away and was buried in the Shiva temple.
संवाद न्यूज एजेंसी
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लुधियाना। हिंदू समाज के मार्गदर्शक और पांच सौ साल पुराने प्राचीन संगला वाला शिवाला के महंत नारायण पुरी का रविवार देर रात अकस्मात निधन हो गया।
उनके निधन का पता चलते ही शहर में शोक की लहर दौड़ पड़ी और महानगर की विभिन्न राजनीतिक, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं, शिवसैनिकों के अलावा गणमान्य उनके अंतिम दर्शनों एवं सुपुत्र महंत दिनेश पुरी के साथ शोक व्यक्त करने के लिए संगला वाला शिवाला में पहुंचे। रात भर लोगों का आना-जाना लगा रहा और लोग सांत्वना व्यक्त करते रहे। सुबह उनका पार्थिव शरीर शिवाला के ही प्रांगण में अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया, जहां हजारों नम आंखों ने महंत नारायण दास पुरी के अंतिम दर्शन किए। उसके बाद दोपहर करीब एक बजे शिवाला प्रांगण में ही उन्हें समाधि दी गई। इस दौरान हजारों नम आंखों से अश्रु निकले।
सनातन धर्म के प्रचार के लिए महंत नारायण पुरी ने शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों को प्रेरित किया व शोभायात्राओं तथा धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया। शहर के विभिन्न इलाकों से महंत नारायण पुरी की अध्यक्षता में शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इसके साथ ही विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी उन्हीं की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे हैं। हिंदू धर्म के साथ हो रही धक्केशाही के खिलाफ महंत नारायण पुरी जी हमेशा डटकर खड़े रहे।
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1952 में हुआ महंत नारायण पुरी जी का जन्म
महंत नारायण पुरी जी का जन्म 17 नवंबर 1952 को महंत कपूर चंद और माता वचनी देवी के घर हुआ। महंत नारायण पुरी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सनातन धर्म प्रचारक स्कूल से प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने आर्य काॅलेज से ग्रेजुएशन की। महंत नारायण पुरी के पिता महंत कपूर चंद प्राचीन संगला वाला शिवाला की सेवा करते थे। उन्हीं से प्रेरित होकर वह पढ़ाई के दौरान ही शिवाला के सेवा में लग गए। महंत नारायण दास पुरी जी को महंत की उपाधि 1981 में मिली। यह उनकी 12वीं पीढ़ी थी। जो प्राचीन संगला वाला शिवाला की सेवा में जुटी हुई है। अब उनके साथ उनका बेटा महंत दिनेश पुरी इस सेवा को निभा रहे हैं।
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