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Panchkula News: बंदर का रूप देकर नारद का अभिमान तोड़ा
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-15 के रघुनाथ मंदिर में चल रही ऋषि पुराण की कथा के दौरान कथा व्यास स्वामी गणेश नंद मिश्रा ने भगवान विष्णु द्वारा महर्षि नारद के अभिमान तोड़ने के प्रसंग का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि महर्षि नारद को एक बार अभिमान हो गया कि उन्होंने काम देव पर विजय प्राप्त कर ली है। इस पर भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अभिमान दूर करने के लिए लीला रची। जिस रास्ते से नारद जी जा रहे थे, उसी रास्ते पर एक माया नगरी का निर्माण किया जो बहुत सुंदर और अलौकिक थी।
नारद जी जब उस नगर में गए तो देखा कि वहां की अत्यंत रूपवान और गुणवान राजकुमारी के स्वयंवर की तैयारी है। नारद जी ने सोचा कि क्यूं न मैं भगवान से उनका रूप मांगकर स्वयंवर में चला जाऊं ताकि ये सुंदर कन्या मुझे चुन ले।
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भगवान तो सब जानते ही थे, उन्होंने नारद को अपना पूरा रूप दे दिया, लेकिन मुख बंदर का दे दिया। नारद जी खुशी-खुशी स्वयंवर में पहुंचे, लेकिन राजकुमारी ने उनका रूप देखकर माला पहनाने की बजाय मुंह फेर लिया। इसके बाद नारद जी ने जल में अपना मुख देखा तो उन्हें बंदर का चेहरा नजर आया। क्रोध से भरे नारद ने विष्णु भगवान को उनको श्राप दे दिया कि आपको मनुष्य के रूप में जन्म लेना होगा और पत्नी के वियोग में भटकना होगा। फिर यही बंदर आपकी मदद करेंगे।
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पंचकूला। सेक्टर-15 के रघुनाथ मंदिर में चल रही ऋषि पुराण की कथा के दौरान कथा व्यास स्वामी गणेश नंद मिश्रा ने भगवान विष्णु द्वारा महर्षि नारद के अभिमान तोड़ने के प्रसंग का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि महर्षि नारद को एक बार अभिमान हो गया कि उन्होंने काम देव पर विजय प्राप्त कर ली है। इस पर भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अभिमान दूर करने के लिए लीला रची। जिस रास्ते से नारद जी जा रहे थे, उसी रास्ते पर एक माया नगरी का निर्माण किया जो बहुत सुंदर और अलौकिक थी।
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नारद जी जब उस नगर में गए तो देखा कि वहां की अत्यंत रूपवान और गुणवान राजकुमारी के स्वयंवर की तैयारी है। नारद जी ने सोचा कि क्यूं न मैं भगवान से उनका रूप मांगकर स्वयंवर में चला जाऊं ताकि ये सुंदर कन्या मुझे चुन ले।
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भगवान तो सब जानते ही थे, उन्होंने नारद को अपना पूरा रूप दे दिया, लेकिन मुख बंदर का दे दिया। नारद जी खुशी-खुशी स्वयंवर में पहुंचे, लेकिन राजकुमारी ने उनका रूप देखकर माला पहनाने की बजाय मुंह फेर लिया। इसके बाद नारद जी ने जल में अपना मुख देखा तो उन्हें बंदर का चेहरा नजर आया। क्रोध से भरे नारद ने विष्णु भगवान को उनको श्राप दे दिया कि आपको मनुष्य के रूप में जन्म लेना होगा और पत्नी के वियोग में भटकना होगा। फिर यही बंदर आपकी मदद करेंगे।