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सिद्धू की नापसंदगी का शिकार हुए नागरा
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चंडीगढ़। चन्नी मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए और पुराने चेहरों को लेकर भले ही यह प्रचारित किया जा रहा है कि मंत्रियों का चयन कांग्रेस हाईकमान द्वारा किया गया है, लेकिन अंदरखाते यह बात सामने आ रही है कि हाईकमान के सामने रखी गई मंत्रियों की सूची चंडीगढ़ में नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी ने तैयार कर ली थी। सूत्रों के अनुसार एक व्यक्ति-एक पद के नियम को दरकिनार करते हुए सिद्धू ने प्रदेश महासचिव और अपने सबसे करीबी विधायक परगट सिंह का नाम तो पहले ही फाइनल कर दिया था। बाकी नाम तय करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष संगत सिंह गिलजियां को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष कुलजीत नागरा इस मामले में कमजोर साबित हुए। सिद्धू के सामने उनकी एक नहीं चली और मंत्रियों की सूची में उनका नाम नहीं आ सका, जबकि उन्हें मंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। इस मामले में सिद्धू की मेहरबानी गुरकीरत कोटली में हुई।
विधायकी से दे चुका हूं इस्तीफा : नागरा
रविवार को पंजाब राजभवन में जब नागरा से उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने का कारण पूछा गया तो उनका जवाब टालमटोल वाला रहा, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि पिछले साल केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि तब यह इस्तीफा नामंजूर हो गया, लेकिन उसके बाद इस साल उन्होंने फिर से इस्तीफा दिया था, जो अब तक विधानसभा स्पीकर के पास विचाराधीन है। नागरा का कहना है कि इसी कारण उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है।
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विधायकी से दे चुका हूं इस्तीफा : नागरा
रविवार को पंजाब राजभवन में जब नागरा से उन्हें मंत्री नहीं बनाए जाने का कारण पूछा गया तो उनका जवाब टालमटोल वाला रहा, लेकिन बाद में उन्होंने बताया कि पिछले साल केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि तब यह इस्तीफा नामंजूर हो गया, लेकिन उसके बाद इस साल उन्होंने फिर से इस्तीफा दिया था, जो अब तक विधानसभा स्पीकर के पास विचाराधीन है। नागरा का कहना है कि इसी कारण उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है।
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