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पंजाब के अस्पतालों में बेकार पड़े 300 से अधिक नए वेंटिलेटर
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कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए खरीदे गए 300 से अधिक वेंटिलेटर बेकार पड़े हैं। सरकार के द्वारा वेंटिलेटर को रेडी टू यूज स्थिति में रखने के बार-बार आदेश देने के बाद भी अभी तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेंटिलेटरों का महीनों तक प्रयोग नहीं किया गया तो वह खराब हो जाएंगे।
पंजाब में कोरोना संक्रमण से अब तक 16 हजार से ज्यादा संक्रमितों की मौत हो चुकी है। संक्रमण की दो लहरों का दौर देखने के बाद इस बार लोगों की सुरक्षा को देखते हुए संभावित तीसरी लहर के लिए सरकार पहले से ही तैयारियों में जुटी रही। इन्हीं तैयारियों के तहत सरकार की ओर से 300 नए वेंटिलेटर की खरीद की गई थी। लाखों रुपये के खरीदे गए अब ये वेंटिलेटर अस्पतालों के बंद कमरों में धूल फांक रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ये सब जानकर भी अंजान बने हुए हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन वेंटिलेटरों को यदि जल्द प्रयोग नहीं किया गया तो ये खराब हो जाएंगे। विशेषज्ञों द्वारा विभाग के उच्चाधिकारियों को सलाह भी दी गई कि इन वेंटिलेटरों का प्रयोग सूबे के अस्पतालों में अन्य समस्याओं के प्रयोग में किया जा सकता है। खासकर बच्चों में जब सांस लेने में परेशानी होती है तो ये वेंटिलेटर उस समय काफी कारगर साबित हो सकते हैं।
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इसलिए वेंटिलेटरों को अन्य चिकित्सा सुविधाओं में सर्वोत्तम उपयोग के लिए अस्पतालों में वितरित किया जा सकता है। इधर स्वास्थ्य सचिव विकास गर्ग ने बताया कि सभी उपलब्ध वेंटिलेटर का जायजा लिया जा रहा है। जहां भी आवश्यक बुनियादी ढांचा और कर्मचारी उपलब्ध होंगे, अस्पतालों को वेंटिलेटरों का वितरण किया जाएगा।
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पंजाब में कोरोना संक्रमण से अब तक 16 हजार से ज्यादा संक्रमितों की मौत हो चुकी है। संक्रमण की दो लहरों का दौर देखने के बाद इस बार लोगों की सुरक्षा को देखते हुए संभावित तीसरी लहर के लिए सरकार पहले से ही तैयारियों में जुटी रही। इन्हीं तैयारियों के तहत सरकार की ओर से 300 नए वेंटिलेटर की खरीद की गई थी। लाखों रुपये के खरीदे गए अब ये वेंटिलेटर अस्पतालों के बंद कमरों में धूल फांक रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ये सब जानकर भी अंजान बने हुए हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन वेंटिलेटरों को यदि जल्द प्रयोग नहीं किया गया तो ये खराब हो जाएंगे। विशेषज्ञों द्वारा विभाग के उच्चाधिकारियों को सलाह भी दी गई कि इन वेंटिलेटरों का प्रयोग सूबे के अस्पतालों में अन्य समस्याओं के प्रयोग में किया जा सकता है। खासकर बच्चों में जब सांस लेने में परेशानी होती है तो ये वेंटिलेटर उस समय काफी कारगर साबित हो सकते हैं।
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इसलिए वेंटिलेटरों को अन्य चिकित्सा सुविधाओं में सर्वोत्तम उपयोग के लिए अस्पतालों में वितरित किया जा सकता है। इधर स्वास्थ्य सचिव विकास गर्ग ने बताया कि सभी उपलब्ध वेंटिलेटर का जायजा लिया जा रहा है। जहां भी आवश्यक बुनियादी ढांचा और कर्मचारी उपलब्ध होंगे, अस्पतालों को वेंटिलेटरों का वितरण किया जाएगा।