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किसानों व कृषि मजदूरों का कर्ज माफ करने का साझा रास्ता तलाशें मोदी - चन्नी

Wed, 01 Dec 2021 11:21 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:21 AM IST
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Modi should find a common way to waive loans of farmers and agricultural laborers - Channi
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि किसानों व कृषि मजदूरों के कर्ज को हमेशा के लिए माफ करने का प्रस्ताव स्वीकार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर अपने हिस्से का बनता बोझ सहन करने को भी तैयार है।
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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि किसानों व कृषि श्रमिकों का कर्ज हमेशा के लिए खत्म करने के उद्देश्य से एक उचित अनुपात वाली केंद्र-राज्य योजना बनाई जानी चाहिए।
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चन्नी ने कहा कि किसान समुदाय के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री चन्नी ने आगे कहा कि हाल ही में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ में उनसे मुलाकात की थी और इनमें से एक बड़ा मसला, जो मेरे स्तर पर लटका हुआ रह गया, वह कृषि कर्ज का है। हालांकि, भारत सरकार के बदले रुख के बाद उम्मीद की किरण जागी है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह पंजाब के किसान ही हैं, जिन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा को यकीनी बनाने की चुनौती को प्रसन्नता से कबूला और हरित क्रांति के अग्रणी बने। अनाज से लबालब गोदाम किसानों की अथक मेहनत के साक्ष्य हैं।
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मुख्यमंत्री चन्नी ने भावुक होते हुए कहा कि जब किसान कृषि करते हैं, उस समय उनके बहादुर पुत्र अपनी जानें न्योछावर कर देश की संवेदनशील सरहदों की रक्षा कर रहे होते हैं। आज भारत मिट्टी के सच्चे सपूतों का दिल से ऋणी है। मेरा यह दृढ़ विचार है कि यह महान देश जिसकी किसानों ने दशकों तक सेवा की, का अब नैतिक फर्ज बनता है कि वह इनका बोझ सहन करे और कृषि कर्ज का मुकम्मल तौर पर निपटारा कर दें। किसी भी बैंकिंग या गैर-बैंकिंग संस्था को कृषि कर्ज की वसूली के लिए हमारे किसानों या कृषि श्रमिकों का दर नहीं खटखटाना चाहिए, क्योंकि यह कर्ज ही किसानों और कृषि श्रमिकों की आत्म-हत्याओं का मूल कारण हैं और इसी कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी दबाव में है।

आने वाली पीढ़ियां हम पर सवाल न खड़े करें : चन्नी
मुख्यमंत्री चन्नी ने प्रधानमंत्री से कहा कि मैं जानता हूं कि कुछ लोग वित्तीय दस्तावेज हाथों में लेकर सवाल करेंगे, लेकिन श्रीमान जी, आप यह याद रखना कि कल न तो मैं और न ही आप यहां होंगे। हमारे फैसले का निचोड़ तब निकाला जाएगा। यह लेखा-जोखा जरूर होगा। चाहे हम खुद विचार करें या हमारे अंतर्मन से यह आवाज आए या फिर यह आवाज तब आए जब हमारी आने वाली पीढ़ियां यह कठिन सवाल खड़ा करेंगी कि हमें भूख मिटाने के लिए रोटी देने वालों और आजाद भारत का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संघर्ष लड़ने वालों के लिए हम क्या कर रहे थे? इतिहास हमें हमारे कर्मों से जाने और जब भी हिसाब-किताब के पल आएं तो हम भय से कांपे न बल्कि लहरों के उलट छाती तान कर खड़े हों।
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