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हरियाणा : गुरुग्राम नगर निगम की मेयर प्रदेश के 9 मेयरों में से सबसे शक्तिशाली
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चंडीगढ़। गुरुग्राम नगर निगम की मौजूदा मेयर मधु आजाद प्रदेश के अन्य 9 मेयरों से सबसे अधिक शक्तिशाली हैं। कानूनी प्रावधान न होने के कारण सभी पार्षद मिलकर भी उनको पद से नहीं हटा सकते हैं, जबकि सितंबर 2017 में इन्हीं पार्षदों ने उनको चुना था। वहीं, आठ निगमों में मतदाताओं द्वारा सीधे मेयर को चुने जाने के बावजूद तीन चौथाई पार्षद अविश्वास प्रस्ताव से मेयर को हटा सकते हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि ऐसा सवा तीन वर्ष पूर्व सितंबर, 2018 में हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में हरियाणा विधानसभा द्वारा संशोधन करते समय हुई एक भूल से हुआ है। 1994 कानून की मूल धारा 37 में यह प्रावधान था कि दो-तिहाई निर्वाचित पार्षदों द्वारा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर को अपने पद से हटाया जा सकेगा, परंतु सितंबर, 2018 में जब नगर निगम के मतदाताओं द्वारा मेयर के प्रत्यक्ष (सीधे) निर्वाचन का प्रावधान किया गया था तब इस धारा में से मेयर शब्द हटा दिया गया। इस प्रकार वर्तमान में इस धारा अनुसार केवल नगर निगम के सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को उनके पद से दो-तिहाई निर्वाचित पार्षदों द्वारा हटाया जा सकता है, मेयर को नहीं।
वहीं, 11 दिसंबर 2020 से प्रदेश में हरियाणा नगर निगम (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू होने से प्रदेश की हिसार, करनाल, पानीपत, रोहतक और यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला और सोनीपत, जिन सभी के मेयरों का निर्वाचन सीधे नगर निगम क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा किए जाने के बावजूद निगम के तीन-चौथाई निर्वाचित पार्षदों के बहुमत से पारित अविश्वास प्रस्ताव द्वारा मेयर पद से हटाया जा सकता है। गुरुग्राम और फरीदाबाद दोनों की मौजूदा मेयर का चुनाव वर्ष 2017 में अप्रत्यक्ष रूप से निगम पार्षदों द्वारा ही किया गया था, इसलिए उन पर उपरोक्त ताजा तीन-चौथाई का मौजूदा कानून लागू नहीं होता है, क्योंकि यह केवल सीधे (प्रत्यक्ष) रूप से निर्वाचित मेयर के संबंध में ही हैै। फरीदाबाद नगर निगम की मेयर सुमन बाला भी इसी प्रकार पावर फुल थी, लेकिन उनका निर्धारित पांच साल का कार्यकाल 12 फरवरी को पूरा हो चुका है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि ऐसा सवा तीन वर्ष पूर्व सितंबर, 2018 में हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में हरियाणा विधानसभा द्वारा संशोधन करते समय हुई एक भूल से हुआ है। 1994 कानून की मूल धारा 37 में यह प्रावधान था कि दो-तिहाई निर्वाचित पार्षदों द्वारा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर को अपने पद से हटाया जा सकेगा, परंतु सितंबर, 2018 में जब नगर निगम के मतदाताओं द्वारा मेयर के प्रत्यक्ष (सीधे) निर्वाचन का प्रावधान किया गया था तब इस धारा में से मेयर शब्द हटा दिया गया। इस प्रकार वर्तमान में इस धारा अनुसार केवल नगर निगम के सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को उनके पद से दो-तिहाई निर्वाचित पार्षदों द्वारा हटाया जा सकता है, मेयर को नहीं।
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वहीं, 11 दिसंबर 2020 से प्रदेश में हरियाणा नगर निगम (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू होने से प्रदेश की हिसार, करनाल, पानीपत, रोहतक और यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला और सोनीपत, जिन सभी के मेयरों का निर्वाचन सीधे नगर निगम क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा किए जाने के बावजूद निगम के तीन-चौथाई निर्वाचित पार्षदों के बहुमत से पारित अविश्वास प्रस्ताव द्वारा मेयर पद से हटाया जा सकता है। गुरुग्राम और फरीदाबाद दोनों की मौजूदा मेयर का चुनाव वर्ष 2017 में अप्रत्यक्ष रूप से निगम पार्षदों द्वारा ही किया गया था, इसलिए उन पर उपरोक्त ताजा तीन-चौथाई का मौजूदा कानून लागू नहीं होता है, क्योंकि यह केवल सीधे (प्रत्यक्ष) रूप से निर्वाचित मेयर के संबंध में ही हैै। फरीदाबाद नगर निगम की मेयर सुमन बाला भी इसी प्रकार पावर फुल थी, लेकिन उनका निर्धारित पांच साल का कार्यकाल 12 फरवरी को पूरा हो चुका है।
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