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बच्चों से भीख मंगवाना और बाल मजदूरी कराना अमानवीय : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। बच्चों से जबरन भीख मंगवाने और बाल मजदूरी कराने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि यह अमानवीय है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को इसे रोकने के लिए कदम उठाने का आदेश दिया है। साथ ही याची के सौंपे मांगपत्र पर 30 दिन में निर्णय लेने का सरकार को आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मोहाली की पीपल्स वेलफेयर सोसायटी ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का सही मायने में पालन करने का पंजाब सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की थी। याची ने बताया कि पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2024 में 713 छापे मार कर 261 बच्चों को मुक्त करवाया गया था, जिनसे भीख मंगवाई जा रही थी। क
लुधियाना में जनवरी 2025 में 166 बच्चों को मुक्त करवाया गया था, जिनसे भीख मंगवाई जा रही थी या जबरन बाल मजदूरी करवाई जा रही थी। याचिका में 2022 की घटना का हवाला दिया गया जब 11 साल की मानसिक दिव्यांग दुष्कर्म के बाद गर्भवती हो गई थी और उसने बच्चे को जन्म दिया था। याची ने कहा कि बच्चों के प्रति अपराध के आंकड़े यह बता रहे हैं कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि यह अमानवीयता है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को 30 दिन के भीतर एक्शन लेने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली की पीपल्स वेलफेयर सोसायटी ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का सही मायने में पालन करने का पंजाब सरकार को निर्देश जारी करने की अपील की थी। याची ने बताया कि पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2024 में 713 छापे मार कर 261 बच्चों को मुक्त करवाया गया था, जिनसे भीख मंगवाई जा रही थी। क
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लुधियाना में जनवरी 2025 में 166 बच्चों को मुक्त करवाया गया था, जिनसे भीख मंगवाई जा रही थी या जबरन बाल मजदूरी करवाई जा रही थी। याचिका में 2022 की घटना का हवाला दिया गया जब 11 साल की मानसिक दिव्यांग दुष्कर्म के बाद गर्भवती हो गई थी और उसने बच्चे को जन्म दिया था। याची ने कहा कि बच्चों के प्रति अपराध के आंकड़े यह बता रहे हैं कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि यह अमानवीयता है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को 30 दिन के भीतर एक्शन लेने का आदेश दिया है।
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