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Panchkula News: कालका वर्कशाॅप में तैयार महात्मा गांधी कोच बढ़ा रहा राजघाट की शोभा

Fri, 23 Jun 2023 01:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jun 2023 01:38 AM IST
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Mahatma Gandhi coach prepared in Kalka workshop is enhancing the beauty of Rajghat
संवाद न्यूज एजेंसी कालका। दिल्ली राजघाट पर कालका रेलवे वर्कशाॅप में तैयार महात्मा गांधी कोच को प्रदर्शनी के तौर पर रखा गया है। उक्त कोच जहां शहर का नाम रोशन कर रहा है, वहीं महात्मा गांधी के समय की भी याद दिला रहा है। गत दिनों कालका वर्कशाॅप से एक टीम ने राजघाट पहुंचकर इस कोच में बिजली फिटिंग समेत अन्य काम को अंजाम दिया। गांधी दर्शन जगह पर इस डिब्बे को महात्मा गांधी के समय चलने वाली ट्रेनों में तीसरी श्रेणी के डिब्बे का स्वरूप दिया गया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब 1915 में भारत लौटे थे, तो उन्होंने कभी प्रथम श्रेणी के कोच का रुख नहीं किया था। हमेशा तीसरे दर्जे के डिब्बे में ही सफर किया था। इसी के मद्देनजर वर्कशाॅप कालका में तैयार इस डिब्बे को तीसरी श्रेणी के डिब्बे की शक्ल दी गई है। इस डिब्बे पर उस तरह की तरह (3) भी लिखा हुआ है।
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यह हैं खूबियां
तीसरी श्रेणी के इस कोच में लकड़ी की सीट है। कोच एक तरफ से पूरा कवर है, जबकि दूसरी तरफ से पारदर्शी है जहां से कोच के अंदर का सारा नजारा दिखाई पड़ता है। रेलवे के अनुसार उस समय में तीसरी श्रेणी के कोच जिस प्रकार के होते थे, कोच को वह स्वरूप देने के लिए पुराने कोच के डिजाइन को वर्कशाप कर्मचारियों ने सर्च किया गया। इसके बाद कोच को उसी प्रकार का स्वरूप दिया गया है। कोच में अधिकांश जगह लकड़ी के काम की शानदार कलाकारी की गई है। जगाधरी रेलवे वर्कशाॅप के अधिकारियों के आदेशानुसार इसे कालका वर्कशाॅप में तैयार किया गया। कोच में तत्कालीन समय के बिजली के उपकरण लगाए गए हैं।
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महात्मा गांधी ने किया है कई बार सफर
विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग पर चलने वाली टॉय ट्रेन देश में ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रसिद्ध है। इस रेलमार्ग पर टाॅय ट्रेन से सफर करने के लिए सर्दियों और गर्मियों के मौसम में सैलानियों का तांता लगा रहता है। बता दें कि महात्मा गांधी ने 1921 में इस मार्ग से यात्रा की थी। आज से करीब 102 वर्ष पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी देश को आजाद करवाने के लिए अंग्रेजी सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत करने शिमला गए थे। वह कालका-शिमला रेल मार्ग से यात्रा करके समरहिल स्टेशन पर उतरे थे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी, लाला लाजपतराय सहित अन्य लोग भी शिमला पहुंचे थे। शिमला आने पर गांधीजी ज्यादातर मैनोर विला, जाखू के फायर ग्रोव या शांति कुटीर में ही ठहरे थे।
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