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एम3एम मनी लॉन्ड्रिंग मामला : ईडी ने बसंत बंसल और पंकज बंसल को किया गिरफ्तार
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माई सिटी रिपोर्टर पंचकूला। एम3एम मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी के डायरेक्टर बसंत बंसल और उनके बेटे पंकज बंसल को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने दोनों को वीरवार को पंचकूला स्थित जिला अदालत में पेश किया। जहां से दोनों आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है। इससे पहले ईडी रूप बंसल को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। बंसल बंधुओं पर 400 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
दोनों भाइयों पर सेल कंपनियों के जरिए 400 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप लगा है। अब तक की जांच में सामने आया है कि एम3एम ग्रुप ने आईआरइओ ग्रुप से 400 करोड़ रुपये लिए हैं। एम3एम ग्रुप में ट्रांजेक्शन को डेवलपमेंट पेमेंट दिखाया गया है। ईडी इस मामले में एम3एम ग्रुप की करोड़ों रुपये की संपत्ति अब तक जब्त कर चुकी है। 10 दिन पहले गुरुग्राम में ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी एम3एम के ठिकानों पर छापा मारकर 60 करोड़ की लग्जरी कारें और छह करोड़ की ज्वेलरी जब्त की थी। एम3एम के मालिक बंसल बंधु के साथ हरियाणा के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी का भी इस ग्रुप में बड़ा शेयर है।
ईडी ने आरोप लगाया है कि एम3एम समूह के प्रवर्तकों बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल, पंकज बंसल और अन्य प्रमुख लोग तलाशी अभियान के दौरान जांच-पड़ताल से जानबूझकर बचते रहे। ईडी ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों के परिसरों की तलाशी के दौरान उसे फेरारी, लैम्बॉर्गिनी, लैंड रोवर, रोल्स रॉयल, बेंटले, मर्सिडीज और मेबैक जैसी 17 लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं।
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एम3एम समूह ने किया था करोड़ों का गबन
जांच एजेंसी का कहना है कि एम3एम समूह के माध्यम से करोड़ों रुपये का गबन किया था। एम3एम ने शेल कंपनियों के माध्यम से आईआरईओ समूह से लगभग 400 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे, जिसे आईआरईओ के दस्तावेजों में डेवलपमेंट राइट्स के भुगतान के रूप में दिखाया गया था। शुरुआत में एम3एम ग्रुप ने 10 करोड़ के भुगतान पर पांच शेल कंपनियों को जमीन के विकास अधिकार बेचे। उसकी तरफ से यह दावा किया गया कि ये पांच कंपनियां असंबद्ध संस्थाएं हैं लेकिन जांच से पता चला कि ये कंपनियां असल में एम3एम समूह द्वारा संचालित थीं।
आईआरईओ समूह को बेच दिए थे अधिकार
ईडी के अनुसार, बाद में इन कंपनियों ने उसी भूमि के विकास अधिकार लगभग 400 करोड़ रुपये में आईआरईओ समूह को बेच दिए। इसके बाद उस राशि को एम3एम ग्रुप को ट्रांसफर कर दिया गया। सभी शेल कंपनियों का स्वामित्व और संचालन एम3एम ग्रुप द्वारा इसके प्रमोटर्स बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल और उनके परिवार के सदस्यों के निर्देशन में किया गया था। इस तरह आईआरईओ और एम3एम ने 400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जो निवेशकों और ग्राहकों के थे।
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दोनों भाइयों पर सेल कंपनियों के जरिए 400 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप लगा है। अब तक की जांच में सामने आया है कि एम3एम ग्रुप ने आईआरइओ ग्रुप से 400 करोड़ रुपये लिए हैं। एम3एम ग्रुप में ट्रांजेक्शन को डेवलपमेंट पेमेंट दिखाया गया है। ईडी इस मामले में एम3एम ग्रुप की करोड़ों रुपये की संपत्ति अब तक जब्त कर चुकी है। 10 दिन पहले गुरुग्राम में ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी एम3एम के ठिकानों पर छापा मारकर 60 करोड़ की लग्जरी कारें और छह करोड़ की ज्वेलरी जब्त की थी। एम3एम के मालिक बंसल बंधु के साथ हरियाणा के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी का भी इस ग्रुप में बड़ा शेयर है।
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ईडी ने आरोप लगाया है कि एम3एम समूह के प्रवर्तकों बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल, पंकज बंसल और अन्य प्रमुख लोग तलाशी अभियान के दौरान जांच-पड़ताल से जानबूझकर बचते रहे। ईडी ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों के परिसरों की तलाशी के दौरान उसे फेरारी, लैम्बॉर्गिनी, लैंड रोवर, रोल्स रॉयल, बेंटले, मर्सिडीज और मेबैक जैसी 17 लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं।
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एम3एम समूह ने किया था करोड़ों का गबन
जांच एजेंसी का कहना है कि एम3एम समूह के माध्यम से करोड़ों रुपये का गबन किया था। एम3एम ने शेल कंपनियों के माध्यम से आईआरईओ समूह से लगभग 400 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे, जिसे आईआरईओ के दस्तावेजों में डेवलपमेंट राइट्स के भुगतान के रूप में दिखाया गया था। शुरुआत में एम3एम ग्रुप ने 10 करोड़ के भुगतान पर पांच शेल कंपनियों को जमीन के विकास अधिकार बेचे। उसकी तरफ से यह दावा किया गया कि ये पांच कंपनियां असंबद्ध संस्थाएं हैं लेकिन जांच से पता चला कि ये कंपनियां असल में एम3एम समूह द्वारा संचालित थीं।
आईआरईओ समूह को बेच दिए थे अधिकार
ईडी के अनुसार, बाद में इन कंपनियों ने उसी भूमि के विकास अधिकार लगभग 400 करोड़ रुपये में आईआरईओ समूह को बेच दिए। इसके बाद उस राशि को एम3एम ग्रुप को ट्रांसफर कर दिया गया। सभी शेल कंपनियों का स्वामित्व और संचालन एम3एम ग्रुप द्वारा इसके प्रमोटर्स बसंत बंसल, रूप कुमार बंसल और उनके परिवार के सदस्यों के निर्देशन में किया गया था। इस तरह आईआरईओ और एम3एम ने 400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जो निवेशकों और ग्राहकों के थे।