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मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया अपने आप में सजा, इसे रोकना जरूरी : हाईकोर्ट

Tue, 10 Sep 2024 05:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 05:08 AM IST
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Long and difficult process of trial is punishment in itself, it is necessary to stop it: High Court
चंडीगढ़। 2020 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया अपने आप में सजा होती है, सांविधानिक अदालतों को ऐसी स्थिति बनने से रोकना चाहिए। पटियाला निवासी राजकुमार उर्फ लवली ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अर्जुन श्योराण ने दलील दी कि याची पर आरोप है कि वह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल था, लेकिन मोबाइल फोन के अलावा उसके पास से कोई अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है।
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पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल था। उसके पास से केवल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें हथियारों के साथ कुछ व्यक्तियों की आपत्तिजनक तस्वीरें और रेफरेंडम 2020 दिखाया गया था। याचिकाकर्ता राष्ट्र विरोधी तत्वों के संपर्क में था और वे कुछ आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने की फिराक में थे। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के पास से केवल एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जिसमें हथियारों और गोला-बारूद आदि की आपत्तिजनक तस्वीरें थीं। आग्नेयास्त्रों या किसी अन्य आपत्तिजनक सामग्री की कोई अन्य बरामदगी नहीं हुई है।
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भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा के मौलिक अधिकार को सुनिश्चित करता है। इसमें त्वरित सुनवाई का अधिकार भी शामिल है, जो पवित्र है। याची तीन साल और आठ महीने से हिरासत में है। सांविधानिक न्यायालय ऐसी स्थिति को रोकना चाहेगा जहां मुकदमे की लंबी और कठिन प्रक्रिया अपने आप में सजा बन जाए। इसी के साथ कोर्ट ने याची को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया।
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