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छह महीने में दूसरी बार पिंजरे में फंसा तेंदुआ, विभाग शिकारियों को पकड़ने में नाकाम
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मोरनी। इलाके के जंगलों में लगातार जानवरों का शिकार किया जा रहा है। इसका ताजा मामला दो दिन पहले मोरनी खंड की थापली पंचायत के गांव बेरला में हुई शिकार की घटना से सामने आया है। हालांकि इस बार तेंदुआ कडक्की (लोहे से बना शिकंजा) से निकलकर भागने में कामयाब तो रहा, लेकिन वह कितना घायल हुआ होगा इसके बारे में अभी जानकारी नहीं मिल पाई है।
इसके बावजूद वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाए अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, तो कभी विभाग इलाके में अपने स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर हर बार की घटना पर पर्दा डालने का काम करता है। वहीं, हैरानी की बात है कि जंगलों में जानवरों की वास्तविक संख्या बताने पर भी विभाग अपने हाथ खड़े कर लेता है। जोकि गांव बेरला की वारदात में भी सामने आया है। इसके बाद दो दिनों तक फर्जी तौर पर गस्त कर सुर्खियां भी बटोरी जाती हैं, लेकिन शिकारियों को पकड़ पाने में नाकाम साबित होते हैं।
पिछले छह महीने में दो बार शिकारियों के पिंजरे में फंसे तेंदुए की घटनाओं ने जंगलों में संबधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इससे पहले इसी साल मई में भी धारटी पंचायत के गांव टीकरी के पास एक पानी के खाली टैंक में गिरकर एक तेंदुआ घायल हो गया था। वह टैंक से निकल नहीं पाया, क्योंकि उसका एक पंजा कडक्की में फंसकर कटा हुआ था। वहीं, बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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इस बारे में वाइल्ड लाइफ विभाग के डिप्टी चीफ श्याम सुंदर का कहना है कि गांव टिकरी के पास तेंदुए के मामले में कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। लेकिन बेरला गांव के मामले में जांच जारी है। जानवरों का शिकार करने वालोें को पकड़ने के लिए हमारे पर कोई विशेष टीम नहीं है।
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इसके बावजूद वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाए अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, तो कभी विभाग इलाके में अपने स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर हर बार की घटना पर पर्दा डालने का काम करता है। वहीं, हैरानी की बात है कि जंगलों में जानवरों की वास्तविक संख्या बताने पर भी विभाग अपने हाथ खड़े कर लेता है। जोकि गांव बेरला की वारदात में भी सामने आया है। इसके बाद दो दिनों तक फर्जी तौर पर गस्त कर सुर्खियां भी बटोरी जाती हैं, लेकिन शिकारियों को पकड़ पाने में नाकाम साबित होते हैं।
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पिछले छह महीने में दो बार शिकारियों के पिंजरे में फंसे तेंदुए की घटनाओं ने जंगलों में संबधित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इससे पहले इसी साल मई में भी धारटी पंचायत के गांव टीकरी के पास एक पानी के खाली टैंक में गिरकर एक तेंदुआ घायल हो गया था। वह टैंक से निकल नहीं पाया, क्योंकि उसका एक पंजा कडक्की में फंसकर कटा हुआ था। वहीं, बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
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इस बारे में वाइल्ड लाइफ विभाग के डिप्टी चीफ श्याम सुंदर का कहना है कि गांव टिकरी के पास तेंदुए के मामले में कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। लेकिन बेरला गांव के मामले में जांच जारी है। जानवरों का शिकार करने वालोें को पकड़ने के लिए हमारे पर कोई विशेष टीम नहीं है।