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पंचकूला: तेंदुए ने छह बकरियों को बनाया शिकार, जंगल में मिले अवशेष
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संवाद न्यूज एजेंसी कालका। गांव टिपरा कांगूवाला (कौशल्या नदी पार) के जंगल में तेंदुए द्वारा बकरियों का शिकार करने का मामला सामने आया है। गांव निवासी चंद्रमुनि की छह बकरियां कुछ दिनों से नहीं मिल रहीं थी। शुक्रवार को इस बात का तब हुआ जब चंद्रमुनि को कौशल्य नदी के पार जंगल में बकरियों के अवशेष पड़े मिले। इसके बाद मामले की जानकारी चंद्रमुनि ने वार्ड पार्षद महेश शर्मा टिंकू को दी। पार्षद ने मामले की जानकारी वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों को दी है। उधर शुक्रवार को वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर पंचकूला सुरजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम टिपरा कांगूवाला गांव में पहुंची और चंद्रमुनि सहित अन्य ग्रामीणों से मुलाकात की। वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर ने भी तेंदुए के हमले की पुष्टि की है।
जानकारी देते हुए सुरजीत सिंह ने बताया कि वे पार्षद महेश शर्मा टिंकू के आग्रह पर गांव में गए थे। उन्होंने जंगल का निरीक्षण किया जहां पर मृत बकरियों के अवशेष पड़े थे, उन्होंने पूरी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि वह अपने पशुओं को जंगल में न छोड़ें। सुरजीत ने ग्रामीणों को बताया कि शाम के बाद जंगलों की तरफ न जाएं। उन्होंने बताया कि मौके पर लोग बता रहे थे कि इन्होंने दो से तीन तेंदुए देखे हैं, हो सकता है कोई मादा तेंदुआ अपने बच्चों के साथ जंगल में घूम रही हो ।
जंगल और उस स्थान का निरीक्षण किया था, जहां बकरियों के अवशेष पड़े थे। प्रारंभिक तौर पर देखने में साफतौर पर जाहिर हो रहा है कि तेंदुए द्वारा ही बकरियोें को आहार बनाया गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि सूरज ढलने के बाद जंगल की तरफ न जाएं और अपने बच्चों को भी समझाएं। ग्रामीणों को बताया कि जंगल में अगर किसी पशु के साथ हादसा होता है तो इस मामले में सरकार द्वारा कोई मुआवजा देने का प्रावधान नही है। अगर किसी के बाड़े में कोई हादसा होता है तो सरकार द्वारा मुआवजा दिया जाता है। - सुरजीत सिंह, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर पंचकूला
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जानकारी देते हुए सुरजीत सिंह ने बताया कि वे पार्षद महेश शर्मा टिंकू के आग्रह पर गांव में गए थे। उन्होंने जंगल का निरीक्षण किया जहां पर मृत बकरियों के अवशेष पड़े थे, उन्होंने पूरी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि वह अपने पशुओं को जंगल में न छोड़ें। सुरजीत ने ग्रामीणों को बताया कि शाम के बाद जंगलों की तरफ न जाएं। उन्होंने बताया कि मौके पर लोग बता रहे थे कि इन्होंने दो से तीन तेंदुए देखे हैं, हो सकता है कोई मादा तेंदुआ अपने बच्चों के साथ जंगल में घूम रही हो ।
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जंगल और उस स्थान का निरीक्षण किया था, जहां बकरियों के अवशेष पड़े थे। प्रारंभिक तौर पर देखने में साफतौर पर जाहिर हो रहा है कि तेंदुए द्वारा ही बकरियोें को आहार बनाया गया है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि सूरज ढलने के बाद जंगल की तरफ न जाएं और अपने बच्चों को भी समझाएं। ग्रामीणों को बताया कि जंगल में अगर किसी पशु के साथ हादसा होता है तो इस मामले में सरकार द्वारा कोई मुआवजा देने का प्रावधान नही है। अगर किसी के बाड़े में कोई हादसा होता है तो सरकार द्वारा मुआवजा दिया जाता है। - सुरजीत सिंह, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर पंचकूला
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