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मधुमक्खी पालन: अच्छे पैकेज पर आईटी कंपनी में कर रहे थे काम, अब शहद उत्पादन से सालाना लाखों की कमाई

Mon, 10 Feb 2025 01:00 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो सुमित यादव, संवाद, पंचकूला
सुमित यादव, संवाद, पंचकूला Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 10 Feb 2025 01:00 AM IST
सार

सुरेश कुमार के पिता ओमप्रकाश ने 2001 से मधुमक्खी पालन करके शहद बेचने का काम शुरू किया। तभी से इस काम को तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ाने का मन बना लिया था।

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Left IT company after doing B.Tech, now doing business of 80 lakhs from honey production
सुरेश कुमार - फोटो : संवाद

विस्तार

गुरुग्राम से बीटेक करने के बाद वहीं आईटी कंपनी में पांच लाख का पैकेज मिला। चार साल तक नौकरी करने के बाद पैतृक कारोबार मधुमक्खी पालन को आगे बढ़ाने का मन हुआ। इस कारण 2014 में गांव आया। मधुमक्खी पालन के व्यापार में एक साल में 80 लाख का टर्नओवर होने लगा है। साल में 15 लाख की बचत भी होती है। यह कहना है गांव जांडली कलां फतेहाबाद निवासी सुरेश कुमार का। 

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सुरेश ने बताया कि उनके पिता ओमप्रकाश ने 2001 से मधुमक्खी पालन करके शहद बेचने का काम शुरू किया। तभी से इस काम को तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ाने का मन बना लिया था। खादी महोत्सव में पहुंचे सुरेश कुमार ने बताया कि दस साल में 50 लोगों को ट्रेनिंग देकर 12 लोगों को नौकरी भी दी है। 

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काम सीखने के लिए अन्य प्रदेशों से भी आते हैं लोग

मधुमक्खी पालन करने के साथ ही 2015 में खादी ग्राम उद्योग से जुड़कर इस व्यापार को पहचान मिली है। बी-बॉक्स तकनीक से अलग-अलग जिलों और अन्य प्रदेशों के जिलों में जाकर मधुमक्खी पालन करके शहद बनाकर बेचने का काम जारी है। इस काम में 12 लोगों की टीम लगी है। शहद बनाने से लेकर पैकिंग करने के लिए गांव के लोग नौकरी करते हैं। इसके अलावा इस व्यापार को सीखने के लिए कई अन्य प्रदेशों से लोग आते हैं। शुरुआत में कमाई कम होती थी, लेकिन 2015 के बाद से टर्नओवर बढ़ने लगा। साल में 80 लाख का टर्नओवर हो रहा है। 2021 में पिता के देहांत के बाद व्यापार की जिम्मेदारी बढ़ गई हैं। व्यापार में बहन के बेटे को जोड़ रखा है।

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बी-मैलीफेरा तकनीक से होता है पालन

सुरेश ने बताया कि इटालियन बी-मैलीफेरा तकनीक से मधुमक्खी पालन करके शहद निकालते हैं। इस तकनीक से राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा के कई जिलों में पालन करते हैं। इस बी-बॉक्स में मधुमक्खी रहती हैं। दो माह में सरसों, अजवाइन, सीसम, सफेदा, सौंफ, धनिया और सूरजमुखी से 30 से 40 किलो शहद निकलते हैं।

देश के सभी राज्यों से आते हैं ऑर्डर

सुरेश ने बताया कि इस व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है। मधुमक्खी पालन फर्म के नाम से बने फेसबुक पेज से देश के सभी राज्यों से ऑर्डर आते हैं। कुरियर के माध्यम से डिलीवरी दी जाती है। दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कोलकाता, वेस्ट बंगाल, राजस्थान, उत्तर-प्रदेश, असम, गोवा आदि मेट्रो सिटी से लोगों के ऑर्डर आते हैं।

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