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Panchkula News: उम्र को पीछे छोड़ मिसाल बनीं महिलाएं, सपनों को मिले पंख तो भरने लगी उड़ान

Wed, 08 Mar 2023 01:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Mar 2023 01:47 AM IST
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Leaving age behind, women became an example, dreams got wings and started flying
दीपक शाहीपंचकूला। कहते हैं, सपनों या शौक को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती है। बस, दिल में जज्बा व जुनून होना चाहिए फिर भले ही उम्र के आखिरी पड़ाव पर क्यों न इसे पूरा किया जाए। अमूमन घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों के बीच कुछ महिलाओं के सपने अधूरे रह जाते हैं, मगर कुछ करने का जज्बा और भीतर पल रहा उनका सपना कभी नहीं मरता। ऐसा ही जज्बा शहर की कुछ महिलाओं में देखने को मिला। ये महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों से फारिग होने के बाद अपने सपनों को पंख दे रही हैं। इतना ही नहीं, वे आज दूसरी महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दे रही हैं। इन महिलाओं को हरियाणा सरकार से खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मान भी मिल चुका है। ऐसी ही कुछ जिंदादिल महिलाओं की कहानी पेश है।
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जिम्मेदारियां कम हुईं तो बचपन के सपनों को पूरा किया
उम्र को अगर हराना है तो शौक जिंदा रखिए, घुटने चले या न चलें, मन उड़ता परिंदा रखिये। कहते हैं कि उम्र महज एक आंकड़ा है। अगर मन में कुछ करने की इच्छा हो तो उम्र कभी भी आपके लिए रुकावट नहीं बनेगी। यह कहना है पंचकूला सेक्टर 21 निवासी 85 वर्षीय उषा शर्मा का। पंजाब एजुकेशन बोर्ड से असिस्टेंट प्रोडक्शन अधिकारी पद से साल 1996 में सेवानिवृत होने के बाद मास्टर एथलीट उषा शर्मा अब अपने बचपन के सपनों को पूरा कर रही हैं। उषा शर्मा ने पूरे देश का 32 दिन में भ्रमण किया है। विश्व के करीब आधे देशों में वह घूम चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 25 सालों तक नौकरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच बंध गई थी, लेकिन मेरे सपनों को 2013 में पंख लगे। आज तक खेल के मैदान में उड़ान भर रही हूं। उन्होंने बताया कि ताऊ देेवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में सैर के लिए जाती थी। उसी समय मास्टर एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए डब्ल्यूसी गोयल ने प्रेरित किया और पहले प्रयास में ही तीन स्वर्ण पदक जीत लिया। उसके बाद आजतक पीछे मुड़कर नहीं देखा। दस सालों में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 36 स्वर्ण, 15 सिल्वर और पांच ब्रांज पदक हासिल कर चुकी हूं। उन्होंने बताया कि अपनी चौथी पीढ़ी के साथ जिंदगी बीता रही हूं। मेरा बेटा अरविंदर सुदर्शन इनकम टैक्स विभाग से ज्वाइंट कमिश्नर के पद से सेवानिवृत हुआ है। अब उसे प्रेरित करती हूं, कि वह भी मास्टर एथलेटिक मीट में हिस्सा ले। उससे एक तो फिटनेस बनी रहेगी और बीमारी भी पास नहीं आएगी। अब उषा शर्मा 23 मार्च में गोवा में होने वाले नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जाने वाली हैं।
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जब जागो तभी सवेरा
कौन कहता है कि हम बुजुर्ग हैं? जब जागो तभी सवेरा। यह तो मन से होता है। मन से हम आज भी किसी युवा से कम नहीं हैं। यह कहना है योग सीखाने वाली 65 वर्षीय मास्टर एथलीट गीता यादव का। गीता का कहना है कि स्कूल के दिनों में बिठवाना गांव से रेवाड़ी जाने वाली बस के पीछे दौड़ लगाती थी, उस समय अच्छा लगता था, लेकिन यह नहीं पता था कि एक दिन दौड़ मेरा पैशन बन जाएगा। गीता यादव ने बताया कि 2009 में ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स घूमने गई थी। वहां राज्यस्तरीय मास्टर्स स्पोर्ट्स मीट चल रहा था। मेरे कार्यालय हिसार से दो लोग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए थे, उन्होंने कहा कि आपको भी हिस्सा लेना चाहिए। उस समय पति भी साथ थे। उन्होंने कहा कि प्रयास करो। पहले ही प्रयास में 1500 मीटर, 800 मीटर, 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। उसके बाद पति ने हौसला बढ़ाया और राज्य से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी मौका मिला और कई पदक जीते। उसके बाद आजतक यह सिलसिला जारी है। अब तक करीब 46 पदक अपने नाम कर चुकी हैैं। गीता यादव हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर बोर्ड से बतौर सुपरिटेंडेंट 2014 में सेवानिवृत हुईं थीं। वह रोजाना सुबह 4 बजे उठती हैं, बुजुर्गों को योग भी सीखाती हैं।
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खेल ने बनाया बिजनेस वुमन
सेक्टर-21 निवासी 42 वर्षीय राखी शर्मा को खेलों में कोई रूचि नहीं थी। वजन कम करने के लिए 2015 से मैराथन में हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे 21 और 42 किलोमीटर की मैराथन का हिस्सा बनीं। बाहर निकलने का भी मौका मिला। पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में व्यायाम करना भी शुरू किया। इस दौरान पता चला कि मास्टर एथलेटिक मीट होने वाली है। साथ के लोगों ने कहा कि मुझे इस मीट में हिस्सा लेना है। पति से राय ली तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी। मैैराथन में दौड़ने की आदत पहले से बनी हुई थी। 2016 में मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप की 5 और 3 किलोमीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। फरवरी 2023 में नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है। आठ साल से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हूं। पदक भी जीत रही हूं। इसके अलावा एक जिम भी खोला है। वहां महिलाओं को फिटनेस की ट्रेनिंग दे रही हूं। उनका कहना है कि खेल ने मुझे घरेलू से बिजनेस वुमन बना दिया है।
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