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खड़क मंगोली प्राथमिक विद्यालय : एक कमरे में लग रही दो कक्षाओं को पढ़ा रहे दो शिक्षक

Sat, 23 Apr 2022 12:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2022 12:57 AM IST
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Khadak Mogul Primary School: Two teachers teaching two classes in one room
पंचकूला। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के सरकारी दावों की पोल खुल रही है। जिले के शहरी क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में संसाधनों की कमी शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डाल रही है। गांव खड़क मंगोली स्थित प्राथमिक राजकीय विद्यालय में कमरों की कमी के कारण दो सेक्शन के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में बैठाकर दो-दो शिक्षक एक साथ पढ़ा रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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इस स्कूल में कुल पांच कमरे हैं, लेकिन पहली से पांचवीं कक्षा में 400 से ज्यादा विद्यार्थी हैं। वहीं 50 बच्चे कदम सेंटर के भी हैं जो इसी स्कूल में पढ़ते हैं। कक्षा में एक साथ 75 बच्चे बैठने के कारण दो-दो शिक्षकों को एक साथ पढ़ाना पड़ रहा है। जगह कम होने के कारण निचली कक्षा के बच्चों को हॉल में जमीन पर बैठाया जा रहा है।
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सात में से दो कमरे खंडहर
1983 में गांव खड़क मंगोली में बने सरकारी प्राथमिक स्कूल के सात कमरों में से दो कमरे खंडहर हो गए हैं। एक कमरे की तो छत टूटकर गिरने लगी है। यहां दीवारों से सीमेंट झड़ता रहता है। इस कारण यहां बच्चों को नहीं बैठाया जाता है। वहीं दूसरे कमरे की फर्श धंस गई है, जो स्कूल इंचार्ज के कमरे से बिल्कुल सटा है। यहां बच्चों को अलग-अलग बैठाने के लिए दूसरी मंजिल पर एक शेड डलवाया गया था, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, लेकिन इस लू और गर्मी में बच्चों को वहां बैठाकर पढ़ाने का मतलब उन्हें बीमार करना है। इसलिए एक कमरे में दो-दो शिक्षकों को मजबूरी में बच्चों को भेड़-बकरी की तरह बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है।
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1983 में खड़क मंगोली में स्कूूल भवन का निर्माण किया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में स्कूल के कई कमरे जर्जर हो गए हैं। एक कक्षा में दो-दो कक्षाएं लग रही हैैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ने में दिक्कत आ रही है। सोमपाल, स्थानीय निवासी।
एक से पांचवीं तक मेरी तीनों बेटियों ने यहां शिक्षा हासिल की है, लेकिन यहां माध्यमिक स्कूल नहीं होने के चलते बच्चों को पंचकूला सेक्टर-6 दो किलोमीटर दूर हाइवे क्रॉस कर जाना पड़ता है। इस स्कूल को दो मंजिला बनाकर मिडिल स्कूल दिया जाए तो यहां के बच्चे यहीं पढ़ाई कर सकते हैं। जसवीर
स्कूल में कमरों की कमी के चलते एक कक्षा में एक साथ 70-80 बच्चों को बैठाया जा रहा है। यहां कमरों की संख्या बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं विभाग को मिडिल स्कूल तक अपग्रेड करना चाहिए, ताकि यहां के बच्चों को दूसरे स्कूलों में एक से दो किमी पैदल चलकर जाना न पड़े। महिंद्रो देवी
एक साथ दो सेक्शन की कक्षाएं एक क्लास रूम में लगेंगी और एक क्लास रूम में दो शिक्षक पढ़ाएंगे तो बच्चों को समझ में क्या आएगा। यहां कमरों की कमी को लेकर कई बार लोग शिक्षा विभाग से गुहार लगा चुके हैैं, लेकिन बच्चों को बैठने के लिए कमरे नहीं बनाए गए। गीता

खड़क मंगोली के प्राथमिक पाठशाला में बच्चों के अनुपात में कमरे कम हैं। यहां के स्थानीय लोग कई बार कमरों की संख्या बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। भवन का नए सिरे से निर्माण के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। मंजूरी और बजट मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा। निरुपमा कृष्ण, डीईईओ पंचकूला।
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