पंचकूला। हरिहर मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में सोमवार को कथा व्यास गुरु मां मुक्तानंद गिरी ने कहा कि राजा की प्रजा दुखी है तो वो राजा भी दुखी है। राजा सोया रहेगा तो प्रजा जागेगी नहीं। केवल राम पर विश्वास करो, सब काम बन जाएंगे। सोमवार को प्रात: पूजन में जेसी संगर, अनिल बंसल, रमेश गोयल, अशोक मित्तल ने पूजा करवाई। संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। शाम को 4 से 6.30 बजे तक कथा में महिलाओं ने भाग लिया। प्रधान विजय अग्रवाल ने बताया कि 15 मई को पूर्णाहुति डाली जाएगी। 10 से 12 बजे तक कथा चलेगी। उसके बाद प्रसाद वितरण होगा। हरिहर मंदिर सेक्टर-12ए के प्रधान विजय अग्रवाल, चीफ पैटर्न सतपाल गुप्ता, सुरेश अग्रवाल, नरेश गोयल, जेके सिंगला, सुरेंद्र गुप्ता, रजनीश बंसल उपस्थित रहे। सज्जन जिंदल ने मंच संचालन किया। कथा में महिलाओं ने भाग लेकर कथा का श्रवण किया। कथा व्यास ने बताया कि जब जटायु नासिक के पंचवटी में रहते थे तब एक दिन आखेट के समय महाराज दशरथ से उनकी मुलाकात हुई और तभी से वे और दशरथ मित्र बन गए। वनवास के समय जब भगवान श्रीराम पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर रहने लगे, तब पहली बार जटायु से उनका परिचय हुआ। भगवान श्रीराम अपने पिता के मित्र जटायु का सम्मान अपने पिता के समान ही करते थे। रावण जब सीताजी का हरण कर लेकर गया तब सीताजी का विलाप सुनकर जटायु ने रावण को रोकने का प्रयास किया, लेकिन अंत में रावण ने तलवार से उनके पंख काट डाले। जटायु मरणासन्न होकर भूमि पर गिर पड़े और रावण सीताजी को लेकर लंका की ओर चला गया। सीता की खोज करते हुए राम जब रास्ते से गुजर रहे थे तो उन्हें घायल अवस्था में जटायु मिले। जटायु मरणासन्न थे। जटायु ने राम को पूरी कहानी सुनाई और यह भी बताया रावण किस दिशा में गया है। जटायु के मरने के बाद राम ने उसका वहीं अंतिम संस्कार और पिंडदान किया। कितनी बड़ी बात है एक गिद्ध जो मांसाहारी है वो भारत का वीर है जो रावण जैसी ताकत के सामने छाती ठोक कर खड़ा हो गया। ऐसे वीरों का देश है ये भारत देश।