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नागर की सीधे बर्खास्तगी की न्यायिक समीक्षा संभव ः एडवोकेट हेमंत

Wed, 08 Dec 2021 01:03 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 08 Dec 2021 01:03 AM IST
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Judicial review of Nagar's direct dismissal possible: Advocate Hemant
चंडीगढ़। बिना नियमित विभागीय जांच करवाए एचसीएस अनिल नागर को सीधे बर्खास्त करने के संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत ने बताया कि हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली, 2016 में कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 311 के खंड 2 (बी) में प्रदेश सरकार कुछ विशेष परिस्थितयों में जांच करवाए बिना भी बर्खास्त करने को पूर्णतया सक्षम है। बशर्ते इस संबंध में कारणों को लिखित तौर पर रिकॉर्ड किया जाए कि ऐसी जांच क्यों नहीं की जा सकती एवं ऐसा करना व्यवहारिक क्यों नहीं होगा? हालांकि हाईकोर्ट इस संबंध में न्यायिक समीक्षा कर सकती है और अगर कोर्ट को रिकार्डेड कारण ठोस न लगें, तो सरकार द्वारा जारी बर्खास्तगी का आदेश को पलटा भी जा सकता है।
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सरकार द्वारा दिए गए तर्क कि नागर एचपीएससी में उप सचिव जैसे ऊंचे पद पर रहे हैं और इसलिए स्टाफ को डरा-धमका सकते हैं और वो उनके विरूद्ध गवाही न दें, पर एडवोकेट हेमंत ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर इससे सहमत नहीं हैं। क्योंकि नागर को 9 महीने पूर्व फरवरी में ही वह आयोग में तैनात किया था और नियमित अधिकारी नहीं है।
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