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नौकरियों में फर्जीवाड़ा ः बीते 20 दिन न नई गिरफ्तारी और न ही परीक्षाओं पर फैसला
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चंडीगढ़। नौकरियों में फर्जीवाड़े मामले में 20 दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी और आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, न ही डेंटल सर्जन व एचसीएस प्री परीक्षाओं पर फैसला लिया गया है। जांच आगे बढ़ाने को लेकर विजिलेंस को नए सबूतों की तलाश है। हरियाणा लोक सेवा आयोग को विजिलेंस की रिपोर्ट का इंतजार है। उस रिपोर्ट के आधार पर ही परीक्षाओं के रद्द करने या फिर अन्य फैसला लिया जाना है।
विजिलेंस ब्यूरो ने 17 नवंबर को आरोपी नवीन को डेंटल सर्जन भर्ती कराने के मामले में 20 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद झज्जर से अश्वनी शर्मा और 18 नवंबर को एचपीएससी के उप सचिव अनिल नागर को उसके कार्यालय से धरा गया था। विजिलेंस ने तीनों आरोपियों के कब्जे से 3 करोड़ 60 लाख रुपये बरामद किए थे और भर्तियों से संबंधित रिकॉर्ड भी जब्त किया था। उस समय दावा किया गया था कि इस खेल में अन्य लोगों के भी शामिल होने का अंदेशा है। क्योंकि एफआईआर में एजेंसी संचालक जसबीर बलहारा व अन्य के नाम भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस ने नागर, अश्वनी और नवीन की कॉल डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है। जिन युवकों ने परीक्षा पास कराने के लिए पैसे दिए हैं, उनसे भी संपर्क साधा जा रहा है। फिलहाल विजिलेंस के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
हजारों युवाओं का इंतजार बढ़ रहा
इधर, हरियाणा के उन हजारों युवाओं का इंतजार बढ़ रहा है कि डेंटल सर्जन और एचसीएस प्री की परीक्षा रद्द होगी या नहीं। क्योंकि पुलिस पूछताछ में नागर व अश्वनी शर्मा ने ये माना था कि कुल 32 परीक्षार्थियों से हुई डील में एचसीएस परीक्षा के लिए 15 में से 5 और डेंटल सर्जन में 17 में से 13 परीक्षार्थी पास हुए हैं। क्योंकि अब हरियाणा सरकार ने एचसीएस अनिल नागर को बर्खास्त कर दिया है, ऐसे में इन परीक्षाओं पर भी रद्द होने का संकट मंडराने लगा है।
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अभी डेंटल सर्जन और एचसीएस प्री परीक्षाओं को लेकर आयोग ने कोई फैसला नहीं लिया है। परीक्षाओं में किस स्तर पर कितनी गड़बड़ी हुई है, उसके आधार पर ही फैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द रिपोर्ट मिलेगी। - आलोक वर्मा, चेयरमैन, एचपीएससी।
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विजिलेंस ब्यूरो ने 17 नवंबर को आरोपी नवीन को डेंटल सर्जन भर्ती कराने के मामले में 20 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद झज्जर से अश्वनी शर्मा और 18 नवंबर को एचपीएससी के उप सचिव अनिल नागर को उसके कार्यालय से धरा गया था। विजिलेंस ने तीनों आरोपियों के कब्जे से 3 करोड़ 60 लाख रुपये बरामद किए थे और भर्तियों से संबंधित रिकॉर्ड भी जब्त किया था। उस समय दावा किया गया था कि इस खेल में अन्य लोगों के भी शामिल होने का अंदेशा है। क्योंकि एफआईआर में एजेंसी संचालक जसबीर बलहारा व अन्य के नाम भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि विजिलेंस ने नागर, अश्वनी और नवीन की कॉल डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है। जिन युवकों ने परीक्षा पास कराने के लिए पैसे दिए हैं, उनसे भी संपर्क साधा जा रहा है। फिलहाल विजिलेंस के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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हजारों युवाओं का इंतजार बढ़ रहा
इधर, हरियाणा के उन हजारों युवाओं का इंतजार बढ़ रहा है कि डेंटल सर्जन और एचसीएस प्री की परीक्षा रद्द होगी या नहीं। क्योंकि पुलिस पूछताछ में नागर व अश्वनी शर्मा ने ये माना था कि कुल 32 परीक्षार्थियों से हुई डील में एचसीएस परीक्षा के लिए 15 में से 5 और डेंटल सर्जन में 17 में से 13 परीक्षार्थी पास हुए हैं। क्योंकि अब हरियाणा सरकार ने एचसीएस अनिल नागर को बर्खास्त कर दिया है, ऐसे में इन परीक्षाओं पर भी रद्द होने का संकट मंडराने लगा है।
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अभी डेंटल सर्जन और एचसीएस प्री परीक्षाओं को लेकर आयोग ने कोई फैसला नहीं लिया है। परीक्षाओं में किस स्तर पर कितनी गड़बड़ी हुई है, उसके आधार पर ही फैसला लिया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द रिपोर्ट मिलेगी। - आलोक वर्मा, चेयरमैन, एचपीएससी।