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फैसला कोर्ट में विचाराधीन, स्टॉल लगाने की अनुमति देना ठीक नहीं

Fri, 04 Oct 2019 01:48 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 01:48 AM IST
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Judgment in the court, it is not right to allow stalls
चंडीगढ़। दशहरा, करवाचौथ और दीपावली पर दुकानदारों को स्टाल लगाने की अनुमति देने के लिए नगर निगम की काउंसिल ने मना किया है। काउंसिल का कहना है कि अभी मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कानूनी रूप से दुकानदारों को स्टाल लगाने की अनुमति देना ठीक नहीं है। साथ ही काउंसिल ने मामले में स्टैंडिंग काउंसिल कमेटी से सलाह लेने को कहा है।
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नगर निगम की काउंसिल दीपाली पुरी ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि मामले को यथा स्थिति में ही ठीक किया जाए। उसमें कोई छेड़छाड़ न हो इसलिए नगर निगम को अपनी ओर से कोई पर्ची देकर स्टाल लगाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इस बार त्योहार पर पहली बार ऐसा हो सकता है कि मार्केट में स्टाल न लगाए जाएं और वेंडरों को मार्केट में बैठने की अनुमति न दी जाए। अब निगम स्टैंडिंग काउंसिल कमेटी से मामले में सलाह लेगा।
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ज्ञात हो कि दीपावली पर मार्केट में स्टाल लगाने को लेकर बीते मंगलवार को मेयर राजेश कालिया, पार्षद रविकांत शर्मा, शक्तिप्रकाश देवशाली, अनिल दुबे और नॉमिनेटेड पार्षद चरनजीव सिंह कई व्यापारी संघ के नेताओं के साथ कमिश्नर केके यादव से मिलने पहुंचे थे। कमिश्नर सहित पार्षदों ने मांग की थी कि दशहरा, करवाचौथ और दीपावली के लिए 20 दिन तक स्टाल लगाने की अनुमति दी जाए। कमिश्नर ने हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए फैसले पर विचार करने को कहा था।
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तीन दिन के लिए व्यापारी मांग रहे हैं अनुमति
पहले त्योहारी सीजन में 20 दिन तक नगर निगम से पर्चियां काटकर स्टाल लगाने की अनुमति दी जाती थी। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब व्यापारियों ने तीन दिन के लिए स्टाल लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि हमने जो सामान खरीदा है, उसे बेचने की अनुमति मिले। वहीं नगर निगम का कहना है जब वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है तो दुकानदारों को रियायत देना का कोई मतलब नहीं।

कोट
त्योहार का सीजन है। सभी व्यापारियों ने सामान खरीद लिया है। इसी मौके पर अच्छी बिक्री की उम्मीद होती है। इससे तो काफी नुकसान होगा।
- चरनजीव सिंह, नामित पार्षद
स्टाल लगाने की काफी पुरानी परंपरा है। इसे अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता है। हाईकोर्ट के आदेश वेंडरों के लिए हैं। दुकानदारों के लिए ऐसा कोई निर्णय नहीं है।
- अनिल बोहरा, अध्यक्ष, व्यापार मंडल
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