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Panchkula News: मोरनी में नोतोड़ भूमि विवाद सुलझाने को संयुक्त टीम गठित
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वन, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी करेंगे सीमांकन, दशकों पुरानी समस्या के समाधान की बढ़ी उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मोरनी क्षेत्र में वर्षों से लंबित नोतोड़ भूमि और वन भूमि विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने वन विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर भूमि सीमांकन का कार्य शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र के लोगों को उनकी जमीनों के मालिकाना अधिकार मिलने की उम्मीद जगी है।
जानकारी के अनुसार शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं अधिवक्ता विजय बंसल ने वर्ष 2017 में इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने वन विभाग को भूमि का सही बंदोबस्त और सीमांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने शपथपत्र देकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
विजय बंसल ने बताया कि फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर (वन बंदोबस्त अधिकारी) के नेतृत्व में गठित टीम में नायब तहसीलदार, 60 पटवारी, चार कानूनगो, तीन डीएफओ तथा चेन्नई की निजी कंपनी अलमेंड्स ग्लोबल इंफ्रा कंसलटेंट लिमिटेड को शामिल किया गया है। यह टीम मोरनी क्षेत्र के सभी 14 भोज कोटाहा और 172 वास सहित अन्य गांवों तथा वन क्षेत्रों का सर्वे और सीमांकन करेगी।
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आधुनिक तकनीक से होगा सर्वे
विजय बंसल ने बताया कि वन बंदोबस्त अधिकारी एम.पी. शर्मा के नेतृत्व में डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) और सैटेलाइट फोटोग्राफी की मदद से सर्वे किया जाएगा। मसावी नक्शों के आधार पर वन एवं गैर-वन भूमि की वास्तविक सीमाएं निर्धारित की जाएंगी, जिससे विवादित जमीनों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हाल ही में पंचकूला में आयोजित बैठक में फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर एम.पी. शर्मा, मुख्य वन संरक्षक जितेंद्र अहलावत, डीएफओ अजय पाल जांगड़ा, डीएफओ मोरनी-पिंजौर विशाल कौशिक, नायब तहसीलदार प्रद्युमन, राजस्व विभाग के अधिकारी, पटवारी, कानूनगो, वन विभाग के अधिकारी तथा निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में भूमि सीमांकन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने पर चर्चा की गई। याचिकाकर्ता विजय बंसल ने कहा कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है और उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का समाधान होने से क्षेत्र के लोगों को उनकी भूमि संबंधी अधिकारों का लाभ मिल सकेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मोरनी क्षेत्र में वर्षों से लंबित नोतोड़ भूमि और वन भूमि विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने वन विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर भूमि सीमांकन का कार्य शुरू कर दिया है। इससे क्षेत्र के लोगों को उनकी जमीनों के मालिकाना अधिकार मिलने की उम्मीद जगी है।
जानकारी के अनुसार शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं अधिवक्ता विजय बंसल ने वर्ष 2017 में इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने वन विभाग को भूमि का सही बंदोबस्त और सीमांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने शपथपत्र देकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
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विजय बंसल ने बताया कि फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर (वन बंदोबस्त अधिकारी) के नेतृत्व में गठित टीम में नायब तहसीलदार, 60 पटवारी, चार कानूनगो, तीन डीएफओ तथा चेन्नई की निजी कंपनी अलमेंड्स ग्लोबल इंफ्रा कंसलटेंट लिमिटेड को शामिल किया गया है। यह टीम मोरनी क्षेत्र के सभी 14 भोज कोटाहा और 172 वास सहित अन्य गांवों तथा वन क्षेत्रों का सर्वे और सीमांकन करेगी।
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विजय बंसल ने बताया कि वन बंदोबस्त अधिकारी एम.पी. शर्मा के नेतृत्व में डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) और सैटेलाइट फोटोग्राफी की मदद से सर्वे किया जाएगा। मसावी नक्शों के आधार पर वन एवं गैर-वन भूमि की वास्तविक सीमाएं निर्धारित की जाएंगी, जिससे विवादित जमीनों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हाल ही में पंचकूला में आयोजित बैठक में फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर एम.पी. शर्मा, मुख्य वन संरक्षक जितेंद्र अहलावत, डीएफओ अजय पाल जांगड़ा, डीएफओ मोरनी-पिंजौर विशाल कौशिक, नायब तहसीलदार प्रद्युमन, राजस्व विभाग के अधिकारी, पटवारी, कानूनगो, वन विभाग के अधिकारी तथा निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में भूमि सीमांकन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने पर चर्चा की गई। याचिकाकर्ता विजय बंसल ने कहा कि हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है और उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे का समाधान होने से क्षेत्र के लोगों को उनकी भूमि संबंधी अधिकारों का लाभ मिल सकेगा।