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झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड; रार बरकरार, आरडब्ल्यूए के अनुसार डंपिंग ग्राउंड से पर्यावरण के साथ वन्य जीवों पर भी मंडराने लगा है खतरा
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पंचकूला। प्रदेश सरकार के आदेश पर गांव झूरीवाला में शिफ्ट डंपिंग ग्राउंड का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। घग्गर पार क्षेत्र के निवासी डंपिंग ग्राउंड को गांव भानू में शिफ्ट करने की मांग पर अड़े हैं। आरडब्ल्यूए के सदस्यों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से इनसान ही नहीं, बल्कि वन्यजीव पर भी खतरा मंडराने लगा है। इतना ही नहीं डंपिंग ग्राउंड से जहां पर्यावरण का संतुलन बिगड़ेगा, वहीं पेड़-पौधों को भी काफी नुकसान होगा। इस मामले को लेकर आरडब्ल्यूए के सदस्यों का संघर्ष जारी है। वह इसके विरोध में जहां प्रदर्शन कर चुके हैं, वहीं अब हाईकोर्ट की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं।
घग्गर पार आरडब्ल्यूए के वरिष्ठ सदस्य बीआर मेहता का कहना है कि वह इस मामले को लेकर बहुत जल्द एनजीटी कोर्ट जाने वाले हैं। एनजीटी ने एक मॉनीटरिंग कमेटी बना रखी है, जिसके चेयरमैन रिटायर जस्टिस प्रीतम पाल हैं, जबकि दो अन्य अधिकारी कमेटी में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आरडब्ल्यूए के सदस्यों की सहमति के बाद डंपिंग ग्राउंड के मामले को 9 जुलाई को कमेटी ने एक मेल करने के साथ डाक के द्वारा कागजात भेजे थे। इस पर संज्ञान लेकर कमेटी ने नगर निगम पंचकूला से सात दिन के अंदर जवाब देने का आदेश दिया है। बीआर मेहता ने बताया कि एनजीटी की मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य आरडब्ल्यूए के फैसले से पूरी तरह सहमत हैं। क्योंकि 2 अगस्त 2013 के फैसले में एनजीटी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि झूरीवाला में किसी भी तरह से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सकता है।
केमिकल युक्त पानी से पेड़ों को होगा नुकसान
शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल का कहना है कि भाजपा प्रदेश सरकार और निगम अधिकारियों के इस फैसले से पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है। डंपिंग ग्राउंड से दूषित पानी और गैस निकलती है। वहीं, डंपिंग ग्राउंड में गिरने वाले कचरे को खाकर पशु भी मर सकते हैं। केमिकल युक्त पानी पेड़ों की जड़ों में जाने से उन्हें नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड के करीब ही एनएच-73 गुजरता है। यहीं से शहर का सारा कूड़ा ट्रैक्टर-ट्राली से झूरीवाला जा रहा है, जिससे वाहन चालकों को भी परेशानी हो रही है।
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डंपिंग ग्राउंड से घग्गर नदी भी होगी दूषित
पंचकूला विकास मंच के सदस्य राकेश अग्रवाल और देवराज शर्मा का कहना है कि झूरीवाला में एक नाला है। इसमें बरसात का सारा पानी इकट्ठा होता है। वह पानी घग्गर नदी में गिरता है। झूरीवाला के डंपिंग ग्राउंड से घग्गर नदी का पानी भी दूषित हो रहा है। वहीं, बरसात होने पर निगम द्वारा बनाई गई सड़क भी पानी से बह गई है, जिसके चलते निगम के वाहन झूरीवाला तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कूड़े से भरे वाहन हाईवे के किनारे खड़े साफ देखे जा सकते हैं।
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घग्गर पार आरडब्ल्यूए के वरिष्ठ सदस्य बीआर मेहता का कहना है कि वह इस मामले को लेकर बहुत जल्द एनजीटी कोर्ट जाने वाले हैं। एनजीटी ने एक मॉनीटरिंग कमेटी बना रखी है, जिसके चेयरमैन रिटायर जस्टिस प्रीतम पाल हैं, जबकि दो अन्य अधिकारी कमेटी में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आरडब्ल्यूए के सदस्यों की सहमति के बाद डंपिंग ग्राउंड के मामले को 9 जुलाई को कमेटी ने एक मेल करने के साथ डाक के द्वारा कागजात भेजे थे। इस पर संज्ञान लेकर कमेटी ने नगर निगम पंचकूला से सात दिन के अंदर जवाब देने का आदेश दिया है। बीआर मेहता ने बताया कि एनजीटी की मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य आरडब्ल्यूए के फैसले से पूरी तरह सहमत हैं। क्योंकि 2 अगस्त 2013 के फैसले में एनजीटी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि झूरीवाला में किसी भी तरह से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सकता है।
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केमिकल युक्त पानी से पेड़ों को होगा नुकसान
शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल का कहना है कि भाजपा प्रदेश सरकार और निगम अधिकारियों के इस फैसले से पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा मंडराने लगा है। डंपिंग ग्राउंड से दूषित पानी और गैस निकलती है। वहीं, डंपिंग ग्राउंड में गिरने वाले कचरे को खाकर पशु भी मर सकते हैं। केमिकल युक्त पानी पेड़ों की जड़ों में जाने से उन्हें नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड के करीब ही एनएच-73 गुजरता है। यहीं से शहर का सारा कूड़ा ट्रैक्टर-ट्राली से झूरीवाला जा रहा है, जिससे वाहन चालकों को भी परेशानी हो रही है।
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डंपिंग ग्राउंड से घग्गर नदी भी होगी दूषित
पंचकूला विकास मंच के सदस्य राकेश अग्रवाल और देवराज शर्मा का कहना है कि झूरीवाला में एक नाला है। इसमें बरसात का सारा पानी इकट्ठा होता है। वह पानी घग्गर नदी में गिरता है। झूरीवाला के डंपिंग ग्राउंड से घग्गर नदी का पानी भी दूषित हो रहा है। वहीं, बरसात होने पर निगम द्वारा बनाई गई सड़क भी पानी से बह गई है, जिसके चलते निगम के वाहन झूरीवाला तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कूड़े से भरे वाहन हाईवे के किनारे खड़े साफ देखे जा सकते हैं।