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झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड मामला : आरडब्ल्यूए ने प्रदेश सरकार को न्यायालय की अवमानना का नोटिस भेजा, डंपिंग साइट के खिलाफ लड़ाई अब हाईकोर्ट में कानूनी रूप से होगी

Fri, 02 Jul 2021 01:42 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 01:42 AM IST
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Jhuriwala dumping ground case: RWA sends contempt of court notice to state government, fight against dumping site will now be legal in High Court
पंचकूला। मुख्यमंत्री के आदेश पर नगर निगम द्वारा झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट करने के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक दिवसीय रोष प्रदर्शन के बाद आरडब्ल्यूए ने प्रदेश सरकार को न्यायालय की अवमानना का नोटिस भेजा है। सेक्टर-25 आरडब्ल्यूए के मुख्य सचिव ने निदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी स्थानीय निकाय विभाग, आयुक्त नगर निगम पंचकूला, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन विभाग समेत हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवहेलना का नोटिस भेजा है। पंचकूला के सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27 व अन्य रिहायशी क्षेत्रों से 500 मीटर कम की दूरी पर ही झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाने के खिलाफ लड़ाई अब हाईकोर्ट में कानूनी रूप से होगी।
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शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-25 के प्रधान संजीव गोयल, महासचिव भगवान दास मित्तल, उपप्रधान बीआर मेहता, सदस्य केवल कृष्ण सिंगला ने स्थानीय निवासियों के साथ बैठक में हाईकोर्ट जाने का फैसला लिया था। बंसल ने कहा कि झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाने का फैसला नियमों के खिलाफ है। इतना ही नहीं पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवमानना है। इस मामले को लेकर 2011 में भी हाईकोर्ट में पंचकूला के सेक्टर-23 स्थित अस्थाई डंपिंग ग्राउंड को शहर से बाहर पंजाब बॉर्डर के नजदीक गांव भानू में शिफ्ट करने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। अस्थाई डंपिंग ग्राउंड से निवासियों को बदबू का सामना करना पड़ रहा है। पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। एचएस वीपी ने पंचकूला एक्सटेंशन के अंतर्गत बरवाला तक सेक्टर विकसित करने की योजना बना रखी है।
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वन क्षेत्र में आता है झूरीवाला
विजय बंसल ने कहा कि झूरीवाला वन क्षेत्र में आता है। यहां भारतीय वन अधिनियम 1927, पीएलपीए 1900, वन संरक्षण एक्ट 1980 आदि लागू है। झूरीवाला खोल ही रायतन वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के अंतर्गत है व इको सेंसिटिव जॉन में है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई कर 12 मार्च 2013 को आदेश पारित कर एनजीटी नई दिल्ली को स्थानांतरित कर कार्रवाई के आदेश दिए थे। अस्थाई डंपिंग ग्राउंड के निरीक्षण के लिए 2 जस्टिस सहित अनेक सदस्यों ने निरीक्षण किया था।
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बिना एनओसी और मंजूरी के बन रहा डंपिंग ग्राउंड
झूरीवाला साइट पर ठोस कचरे के डंपिंग के लिए निगम द्वारा पर्यावरण विभाग से कोई मंजूरी और एनओसी नहीं ली गई है। एक मार्च 2013 की पूर्व मंजूरी के बाद से केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से कोई नई मंजूरी नहीं है, जोकि पहले ही समाप्त हो चुकी है। झूरीवाला साइट के वन क्षेत्र में पहले से ही घने पेड़ हैं, इसलिए सभी पेड़ों को एमसी द्वारा काटा जाएगा।

एचसीवीपी के ब्रोशर में झूरीवाला प्लांट का जिक्र नहीं था
एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि पर्यावरण वन जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अंतिम स्वीकृति के दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र नियम 2016 लागू नहीं थे। प्रस्तावित झूरीवाला साइट वाणिज्यिक क्षेत्रों के ठीक विपरीत है। 23-ए और 25 भाग 2 यहां ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की स्थापना से यहां वाणिज्यिक भूखंडों की बिक्री प्रभावित होगी। घग्गर पार सेक्टरों में आवासीय भूखंडों की बिक्री करते समय एचएसवीपी ने झूरीवाला में एक एसडब्ल्यूएमपी स्थापित करने का खुलासा नहीं किया था। एचएसवीपी के बिक्री ब्रोशर में सार्वजनिक किए जाने की स्थिति में मौजूदा निवासियों ने घग्गर पार सेक्टर में अपने भूखंड नहीं खरीदे होंगे। घग्गर पार सेक्टरों में रहने वाले बीस हजार से अधिक परिवार पिछले दस वर्षों से झूरीवाला में प्रस्तावित एसडब्ल्यूएमपी का विरोध कर रहे हैं।
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