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Panchkula News: सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की जांच शुरू, एंटी करप्शन ब्यूरो ने देखे दस्तावेज और बिल, लोगों से की जा रही पूछताछ
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मोरनी। मोरनी से पंचकूला मार्ग पर स्थित थाणा गांव से मरोग स्कूल पोलिंग बूथ तक बनने वाली सड़क में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। 2.5 करोड़ की लागत वाले करीब 4 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण में स्थानीय ग्रामीणों ने घोटाले के आरोप लगाए थे।
शुक्रवार को एसीबी अधिकारी एक्सईएन जय सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और बिलों की जांच की। प्रारंभिक निरीक्षण में भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है। यदि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
इस सड़क के निर्माण के लिए हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सिफारिश पर 2.5 करोड़ का बजट जारी किया था। इस रकम से स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा के लिए पोलिंग बूथ तक रास्ता बनाया जाना था। यह निर्माण कार्य वन विभाग की ओर से विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा था। लेकिन, ग्रामीणों की शिकायतों और जांच के बाद मामला अब भ्रष्टाचार जांच एजेंसी तक पहुंच गया है।
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पहली बरसात में ये उखड़नी शुरू हो गई सड़क
करीब तीन वर्ष पहले वन विभाग ने सड़क का निर्माण करवाया था, लेकिन निर्माण पूरा होते ही ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्रियां घटिया थीं और कई आवश्यक संरचनाएं बनाई ही नहीं गईं। विशेष रूप से ड्रेनेज सिस्टम, बचाव दीवारें और इंटरलॉकिंग टाइल्स को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई हैं। इसके निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पहली बरसात में ये उखड़नी शुरू हो गई थी। अधिकतर बचाव दीवारें ढह गईं थी। जिसके बाद ग्रामीणों का विरोध बढ़ गया था।
पानी निकासी के लिए 6950 मीटर की ड्रेन सिर्फ कागजों में बनाई
शिकायत करने वाले निर्मल सिंह, बलजीत सिंह आदि ग्रामीणों और युवाओं ने आरोप लगाए हैं कि बचाव दीवारों में बेहद कम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। रेत के स्थान पर घटिया क्वालिटी की डस्ट लगाई गई है। फर्जी बिलों के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई। इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का प्रावधान था, लेकिन आज तक नहीं लगाई गईं। पानी निकासी के लिए 6950 मीटर की ड्रेन सिर्फ कागजों में बनाई गई है। मार्ग पर कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। मार्ग के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन हुआ है। जिसके चलते रास्ता आज भी चलने लायक नहीं है। ग्रामीण बताते है कि इस सड़क की जो हालत तीन वर्ष पहले हुआ करती थी, अब उससे भी खराब है।
एसीबी से जागी न्याय की आस
पिछले दो वर्षों में ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं ने विभिन्न स्तरों पर कई बार शिकायतें दर्ज कराईं। अक्टूबर 2023 से फरवरी 2025 तक लगातार प्रयासों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के उच्च अधिकारी आलोक मित्तल से मिला और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनकी गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए। युवाओं और स्थानीय निवासियों को अब उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी। एसीबी की कार्रवाई से ग्रामीणों ने संतोष जताया और अधिकारियों का धन्यवाद किया।
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शुक्रवार को एसीबी अधिकारी एक्सईएन जय सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और बिलों की जांच की। प्रारंभिक निरीक्षण में भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है। यदि भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
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इस सड़क के निर्माण के लिए हरियाणा सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सिफारिश पर 2.5 करोड़ का बजट जारी किया था। इस रकम से स्थानीय ग्रामीणों की सुविधा के लिए पोलिंग बूथ तक रास्ता बनाया जाना था। यह निर्माण कार्य वन विभाग की ओर से विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा था। लेकिन, ग्रामीणों की शिकायतों और जांच के बाद मामला अब भ्रष्टाचार जांच एजेंसी तक पहुंच गया है।
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पहली बरसात में ये उखड़नी शुरू हो गई सड़क
करीब तीन वर्ष पहले वन विभाग ने सड़क का निर्माण करवाया था, लेकिन निर्माण पूरा होते ही ग्रामीणों ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्रियां घटिया थीं और कई आवश्यक संरचनाएं बनाई ही नहीं गईं। विशेष रूप से ड्रेनेज सिस्टम, बचाव दीवारें और इंटरलॉकिंग टाइल्स को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई हैं। इसके निर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि पहली बरसात में ये उखड़नी शुरू हो गई थी। अधिकतर बचाव दीवारें ढह गईं थी। जिसके बाद ग्रामीणों का विरोध बढ़ गया था।
पानी निकासी के लिए 6950 मीटर की ड्रेन सिर्फ कागजों में बनाई
शिकायत करने वाले निर्मल सिंह, बलजीत सिंह आदि ग्रामीणों और युवाओं ने आरोप लगाए हैं कि बचाव दीवारों में बेहद कम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। रेत के स्थान पर घटिया क्वालिटी की डस्ट लगाई गई है। फर्जी बिलों के माध्यम से धन की हेराफेरी की गई। इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का प्रावधान था, लेकिन आज तक नहीं लगाई गईं। पानी निकासी के लिए 6950 मीटर की ड्रेन सिर्फ कागजों में बनाई गई है। मार्ग पर कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई। मार्ग के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन हुआ है। जिसके चलते रास्ता आज भी चलने लायक नहीं है। ग्रामीण बताते है कि इस सड़क की जो हालत तीन वर्ष पहले हुआ करती थी, अब उससे भी खराब है।
एसीबी से जागी न्याय की आस
पिछले दो वर्षों में ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं ने विभिन्न स्तरों पर कई बार शिकायतें दर्ज कराईं। अक्टूबर 2023 से फरवरी 2025 तक लगातार प्रयासों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के उच्च अधिकारी आलोक मित्तल से मिला और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनकी गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए। युवाओं और स्थानीय निवासियों को अब उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी। एसीबी की कार्रवाई से ग्रामीणों ने संतोष जताया और अधिकारियों का धन्यवाद किया।