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आर्थिक अपराध गंभीर न हो तो दी जा सकती है आरोपी को जमानत : हाईकोर्ट

Sun, 01 Jun 2025 01:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jun 2025 01:06 AM IST
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If the economic crime is not serious then the accused can be granted bail: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी आर्थिक अपराधों में जेल जाना सामान्य बात नहीं होनी चाहिए, खासकर तब जब आरोप गंभीर प्रकृति के न हों।
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जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा कि सभी आर्थिक अपराधों को एक समूह में वर्गीकृत करना तथा उस आधार पर जमानत देने से इन्कार करना उचित नहीं है। जमानत देने के प्रश्न पर विचार करते समय अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना आवश्यक है। प्रत्येक मामले में उत्पन्न तथ्यों और परिस्थितियों से गंभीरता का पता लगाया जाना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में से एक सजा की अवधि भी है जो आरोपी द्वारा किए गए कथित अपराध के लिए निर्धारित की गई है।
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हाईकोर्ट के समक्ष फतेहगढ़ साहिब का मामला पहुंचा था जिसमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के तहत शिकायत से उत्पन्न मामले में याचिकाकर्ताओं को नियमित जमानत देने के लिए याचिका दाखिल की गई थी। यह आरोप लगाया गया था कि मेसर्स दशमेश ट्रेडर्स के नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी और फर्म फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने और उसे आगे बढ़ाने में लगी हुई थी।
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फर्म और उसके व्यवसाय की वास्तविकता का पता लगाने के लिए प्रतिवादी द्वारा जांच शुरू की गई थी। यह पता चला कि फर्म को झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों का दुरुपयोग करके एक काल्पनिक पते पर पंजीकृत किया गया था।

न्यायालय ने पाया कि सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132 के अनुसार कथित अपराधों के लिए न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 5 वर्ष कारावास की सजा है और यह समझौता योग्य भी है। कोर्ट ने कहा कि यह देखते हुए कि कथित अपराध अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा के साथ दंडनीय हैं न्यायालय ने कुछ शर्तों के अधीन याची को जमानत दे दी।
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