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कैसे हों शौचालय साफ.. सुलभ मांग रहा बकाया 74 लाख

Fri, 12 Feb 2021 01:59 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2021 01:59 AM IST
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How to clean toilets .. Sulabh demands 74 lakh outstanding
सेक्टर-14 स्थित खस्ताहाल अस्‍थायी शौचालय। - फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। शहर के शौचालयों की दयनीय सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मेयर कुलभूषण गोयल ने वीरवार को अधिकारियों की बैठक बुलाई। मेयर ने कहा कि शौचालयों की हालत बदतर है। लोग उनका इस्तेमाल नहीं करते हैं। बैठक में सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाइजेशन के डिप्टी डायरेक्टर प्रमोद सिंह ने कहा कि निगम की तरफ सफाई कर्मियों के वेतन, मरम्मत कार्य का 74 लाख रुपये बकाया है।
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बैठक में मुख्य रूप से शौचालयों की सफाई व्यवस्था की चरमराई व्यवस्था उजागर हुई। मेयर ने कहा कि शहर के सामुदायिक शौचालय की हालत जर्जर है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है, इस कारण स्थानीय लोग शौचालयों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। राहगीरों की सुविधा के लिए सड़क किनारे बनाए 320 अस्थायी शौचालय दयनीय स्थिति में हैं, लेकिन मरम्मत नहीं हो पा रहा है।
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लोग निगम के अधिकारियों से लगातार शिकायत कर रहे हैं। मेयर ने मीटिंग के दौरान जब सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल किए तो सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाइजेशन के डिप्टी डायरेक्टर प्रमोद सिंह ने जवाब दिया कि कई महीनों से भुगतान न होने से सारी व्यवस्था चरमरा गई है। इसके बाद भी वह लगातार सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं।
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निगम उन्हें प्रतिमाह करीब 9.5 लाख रुपये का भुगतान करता है, पांच माह से इस रकम का भी भुगतान नहीं हुआ है। अब तक 32 लाख रुपये बकाया है। आर्गेनाइजेशन द्वारा करवाए मरम्मत कार्य का करीब 42 लाख रुपये बाकी है। यदि दोनों राशि को जोड़ा जाए तो यह रकम 74 लाख रुपये बनता है।
चार साल में सुधरी रैंकिंग
सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस आर्गेनाइजेशन के डिप्टी डायरेक्टर प्रमोद सिंह ने बताया कि वह शहर के शौचालयों की सफाई की जिम्मेदारी चार साल से संभाल रहे हैं। इस दौरान पंचकूला की रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। इस बात को मेयर कुलभूषण गोयल ने भी स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने कहा कि कागजों में भले ही पंचकूला नंबर वन पर आ गया है, लेकिन धरातल पर अभी सुधार की काफी जरूरत है।

अन्य को देने की तैयारी
आर्गेनाइजेशन के पदाधिकारियों ने बताया नगर निगम अंदर खाते शहर के मार्केट में बने सामुदायिक शौचालय की देखरेख की जिम्मेदारी मार्केट एसोसिएशन को सौंपने की तैयारी कर रहा है। निकाय चुनाव के बाद ही सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायत आनी शुरू हुई है, जबकि इससे पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। उन्होंने कहा कि यदि कार्य सही न होता तो पंचकूला की रैंकिंग में सुधार कैसे होता। बीते दिनों आई रिपोर्ट में पंचकूला नंबर वन आया है, जबकि करनाल दूसरे स्थान पर है। डिप्टी डायरेक्टर ने माना कि 50 फीसदी शौचालय की हालत ठीक नहीं है और सुधार की जरूरत है।
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