{"_id":"6150d3348ebc3efcaf746d8b","slug":"hospital-piku-of-general-hospital-will-become-a-protective-shield-for-children-pkl-office-news-pkl4281255136","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल : जनरल अस्पताल का ‘पीकू’ बनेगा बच्चों का सुरक्षा कवच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल : जनरल अस्पताल का ‘पीकू’ बनेगा बच्चों का सुरक्षा कवच
विज्ञापन
पंचकूला। जनरल अस्पताल सेक्टर-6 में करीब दो करोड़ रुपये की लागत निर्माणाधीन नौ बेड के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) का लाभ जल्द ही 28 दिन से 17 साल तक के बच्चों को मिल सकेगा। इलाज के अभाव में बच्चों और उनके परिजनों को न तो रेफर का दंश झेलना पड़ेगा न ही पीजीआई चंडीगढ़ और जीएमसीएच पर निर्भर रहना पड़ेगा। अक्तूबर 2021 से गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों का यहां स्थापित सात वेंटिलेटर में निशुल्क इलाज हो सकेगा। इस यूनिट के अस्तित्व में आने के बाद इलाज के अभाव में दम तोड़ने वाले बच्चों की संख्या भी कम होगी। इसके अलावा निजी अस्पतालों में महंगे इलाज से भी राहत मिलेगी। इस प्रकार जनरल अस्पताल का पीकू बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा।
क्या है पीआईसीयू यूनिट
नौ बेड वाले पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में एक माह से 17 साल के बच्चों को एडमिट किया जाता है। इसको गहन बाल चिकित्सा वार्ड भी कहा जाता है, इससे तात्पर्य उन मरीजों को दिए विशेष उपचार से है, जो गंभीर रूप से अस्वस्थ होते हैं। उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की जरूरत होती है। यूनिट में इमरजेंसी जांच से जुड़े सभी संसाधन हैं। इनमें वेंटिलेटर, आक्सीजन जैसी जीवन रक्षक मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर्स की पूरी टीम की तैनाती होती है। इससे मरीजों को उचित एवं ठीक से उपचार मिल सके। नागरिक अस्पताल में अगले माह से शुरू होने वाले पीआईसीयू में अभी फिलहाल सात वेंटिलेटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा रेडियेंट वार्मर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, इनफ्यूजन पंप, मल्टीपेरामीटर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, लेरिंगोस्कोप सहित एक दर्जन से ज्यादा जीवन रक्षक उपकरण लगाए गए हैं।
साढ़े चार हजार मरीज रोजाना कराते हैं इलाज
सेक्टर-6 पंचकूला के जनरल अस्पताल में रोजाना साढ़े चार हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें इमरजेंसी की ओपीडी में 450 मरीज आते हैं। इसमें दस पेशेंट को पीआईसीयू वार्ड की जरूरत होती है। इलाज के दौरान यह वार्ड नहीं होने के कारण पेशेंट को रेफर करना पड़ता है। पीआईसीयू का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। कुछ छोटे मोटे काम बचे हैं, जिसे पंचकूला की सीएमओ मुक्ता कुमार करवा रही हैं।
विज्ञापन
कैसे होती है बच्चों की देखभाल
पीकू (पीकू) में मरीजों पर कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है। कई ट्यूबों, तारों और केबल्स द्वारा उपकरण से मरीजों को जोड़ा जाता है। आम तौर पर प्रत्येक एक या दो मरीजों के लिए एक नर्स होती है, जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं, उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाने की भी संभावना होती है।
अक्तूबर से सिविल अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) की सुविधा मरीजों को मिलेगी। इसका सेटअप तैयार हो चुका है। कुछ छोटे मोटे काम बाकी हैं, जिन्हें पूरा किया जा रहा है। इस सुविधा का लाभ 28 दिन से 17 साल तक के बच्चे ले सकेंगे। - मुक्ता कुमार, सिविल सर्जन पंचकूला।
विज्ञापन
क्या है पीआईसीयू यूनिट
नौ बेड वाले पीडियाट्रिक्स इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में एक माह से 17 साल के बच्चों को एडमिट किया जाता है। इसको गहन बाल चिकित्सा वार्ड भी कहा जाता है, इससे तात्पर्य उन मरीजों को दिए विशेष उपचार से है, जो गंभीर रूप से अस्वस्थ होते हैं। उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की जरूरत होती है। यूनिट में इमरजेंसी जांच से जुड़े सभी संसाधन हैं। इनमें वेंटिलेटर, आक्सीजन जैसी जीवन रक्षक मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टर्स की पूरी टीम की तैनाती होती है। इससे मरीजों को उचित एवं ठीक से उपचार मिल सके। नागरिक अस्पताल में अगले माह से शुरू होने वाले पीआईसीयू में अभी फिलहाल सात वेंटिलेटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा रेडियेंट वार्मर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, इनफ्यूजन पंप, मल्टीपेरामीटर मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, लेरिंगोस्कोप सहित एक दर्जन से ज्यादा जीवन रक्षक उपकरण लगाए गए हैं।
विज्ञापन
साढ़े चार हजार मरीज रोजाना कराते हैं इलाज
सेक्टर-6 पंचकूला के जनरल अस्पताल में रोजाना साढ़े चार हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें इमरजेंसी की ओपीडी में 450 मरीज आते हैं। इसमें दस पेशेंट को पीआईसीयू वार्ड की जरूरत होती है। इलाज के दौरान यह वार्ड नहीं होने के कारण पेशेंट को रेफर करना पड़ता है। पीआईसीयू का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। कुछ छोटे मोटे काम बचे हैं, जिसे पंचकूला की सीएमओ मुक्ता कुमार करवा रही हैं।
विज्ञापन
कैसे होती है बच्चों की देखभाल
पीकू (पीकू) में मरीजों पर कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है। कई ट्यूबों, तारों और केबल्स द्वारा उपकरण से मरीजों को जोड़ा जाता है। आम तौर पर प्रत्येक एक या दो मरीजों के लिए एक नर्स होती है, जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं, उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाने की भी संभावना होती है।
अक्तूबर से सिविल अस्पताल में पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीकू) की सुविधा मरीजों को मिलेगी। इसका सेटअप तैयार हो चुका है। कुछ छोटे मोटे काम बाकी हैं, जिन्हें पूरा किया जा रहा है। इस सुविधा का लाभ 28 दिन से 17 साल तक के बच्चे ले सकेंगे। - मुक्ता कुमार, सिविल सर्जन पंचकूला।