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ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की दलील देकर अस्पताल को नहीं हटा सकते: हाईकोर्ट

Thu, 20 Mar 2025 01:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Mar 2025 01:11 AM IST
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Hospital cannot be removed on the pretext of increased traffic pressure: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल के निर्माण को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा। खासकर जब राज्य प्राधिकरण की ओर से मल्टी-लेवल पार्किंग की योजना बनाई गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल को हटाना संविधान के तहत व्यापार और पेशे के अभ्यास के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।
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पंचकूला सेक्टर-21 के लेआउट प्लान को चुनौती देते हुए स्थानीय निवासियों ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आवासीय क्षेत्र को नर्सिंग क्षेत्र में बदला गया और प्रभावित निवासियों से आपत्ति व सुझाव नहीं मांगे गए। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की पीठ ने कहा कि प्रतिवादी संबंधित स्थल पर अलकेमिस्ट अस्पताल चला रहे हैं, जहां अतिरिक्त बुनियादी ढांचे को जोड़ा जाएगा। व्यापार और पेशा करने के अधिकार को मौजूदा याचिका के माध्यम से रोका नहीं जा सकता, जब तक कि याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को स्पष्ट रूप से कोई ठोस क्षति न हो।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अस्पताल के मौलिक अधिकार को बाधित किया गया, तो यह अन्याय होगा। कोर्ट ने पाया कि सेक्टर-21 को नियंत्रित क्षेत्र घोषित नहीं किया गया था, इसलिए आपत्तियां आमंत्रित करने की आवश्यकता नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि लेआउट में बदलाव से याचिकाकर्ताओं को कोई सीधा नुकसान होने के प्रमाण नहीं हैं। नर्सिंग होम साइटों को जोड़ना जनकल्याण के लिए किया गया है, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी।
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पार्किंग की समस्या को लेकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि मल्टी-लेवल पार्किंग और अतिरिक्त फुटपाथ का निर्माण किया जाएगा। कोर्ट ने इस समाधान को संतोषजनक माना। पीठ ने यह भी कहा कि जिन भूखंडों की ई-नीलामी की गई, उसकी सूचना पहले ही दी गई थी। याचिकाकर्ताओं को उस समय आपत्ति का अधिकार था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब वे इस नीलामी को चुनौती नहीं दे सकते।
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