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आन के लिए हत्या, समाज की अंतरात्मा की जड़ों पर प्रहार, जमानत के हकदार नहीं: हाईकोर्ट
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डबल मर्डर केस में हाईकोर्ट ने नियमित जमानत याचिका को किया खारिज
पंजाब के मोगा में 2021 में दर्ज की गई थी विभिन्न धाराओं में एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आन के लिए हत्या के आरोप में 2021 में दर्ज एफआईआर में आरोपी की नियमित जमानत की मांग वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकृति के अपराध सार्वजनिक व्यवस्था और समाज की अंतरात्मा की जड़ों पर प्रहार करते हैं।
जस्टिस सुमित गोयल ने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जमानत देना न केवल अपराध की गंभीरता को कमतर आंकना होगा, बल्कि इससे आरोपियों का मनोबल भी बढ़ सकता है। मामला पंजाब के मोगा जिले में वर्ष 2021 में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ हत्या, घर में घुसकर हमला, अपहरण और गैरकानूनी जमावड़ा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतक रोहताश सिंह ने सुमन के साथ उसके परिजनों की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था। संभावित खतरे को देखते हुए दंपती ने गांव रोंटा निवासी शिकायतकर्ता सुखदेव सिंह के घर शरण ली थी। 17 अक्तूबर 2021 को दोपहर के समय लगभग 15-16 लोग तीन गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने दीवार फांदकर घर में जबरन प्रवेश किया, दंपती के साथ मारपीट की और दिनदहाड़े उनका अपहरण कर लिया।
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जाते समय आरोपियों ने प्रेम विवाह को लेकर धमकियां भी दीं। बाद में दोनों के शव फाजिल्का जिले के अबोहर उपमंडल के गांव सप्पन वाली की गली में फेंके हुए मिले। आरोपी को 5 नवंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था और 31 जनवरी 2022 को चालान पेश किया गया। उसकी पिछली जमानत याचिका 8 जनवरी 2024 को वापस ले ली गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि क्रमिक जमानत याचिका पर कोई वैधानिक रोक नहीं है लेकिन उसे सुनने के लिए परिस्थितियों में सार्थक बदलाव होना आवश्यक है। मामला सुनियोजित और समन्वित अपहरण व दोहरे हत्याकांड का है, जो ऑनर किलिंग की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर विशिष्ट भूमिका न होने की दलील पर विस्तार से विचार नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब समान उद्देश्य और आपराधिक साजिश की धाराएं लागू हों।
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पंजाब के मोगा में 2021 में दर्ज की गई थी विभिन्न धाराओं में एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आन के लिए हत्या के आरोप में 2021 में दर्ज एफआईआर में आरोपी की नियमित जमानत की मांग वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकृति के अपराध सार्वजनिक व्यवस्था और समाज की अंतरात्मा की जड़ों पर प्रहार करते हैं।
जस्टिस सुमित गोयल ने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जमानत देना न केवल अपराध की गंभीरता को कमतर आंकना होगा, बल्कि इससे आरोपियों का मनोबल भी बढ़ सकता है। मामला पंजाब के मोगा जिले में वर्ष 2021 में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ हत्या, घर में घुसकर हमला, अपहरण और गैरकानूनी जमावड़ा सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार मृतक रोहताश सिंह ने सुमन के साथ उसके परिजनों की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था। संभावित खतरे को देखते हुए दंपती ने गांव रोंटा निवासी शिकायतकर्ता सुखदेव सिंह के घर शरण ली थी। 17 अक्तूबर 2021 को दोपहर के समय लगभग 15-16 लोग तीन गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने दीवार फांदकर घर में जबरन प्रवेश किया, दंपती के साथ मारपीट की और दिनदहाड़े उनका अपहरण कर लिया।
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जाते समय आरोपियों ने प्रेम विवाह को लेकर धमकियां भी दीं। बाद में दोनों के शव फाजिल्का जिले के अबोहर उपमंडल के गांव सप्पन वाली की गली में फेंके हुए मिले। आरोपी को 5 नवंबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था और 31 जनवरी 2022 को चालान पेश किया गया। उसकी पिछली जमानत याचिका 8 जनवरी 2024 को वापस ले ली गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि क्रमिक जमानत याचिका पर कोई वैधानिक रोक नहीं है लेकिन उसे सुनने के लिए परिस्थितियों में सार्थक बदलाव होना आवश्यक है। मामला सुनियोजित और समन्वित अपहरण व दोहरे हत्याकांड का है, जो ऑनर किलिंग की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर विशिष्ट भूमिका न होने की दलील पर विस्तार से विचार नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब समान उद्देश्य और आपराधिक साजिश की धाराएं लागू हों।