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हाई प्रोफाइल जांच पर हाईकोर्ट सख्त: 22 दिन में छह सुनवाई, प्रगति नहीं
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हाई प्रोफाइल लोगों के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच पर सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने 22 दिन में छह सुनवाई के बावजूद ठोस प्रगति न होने पर नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादियों की ओर से अब स्थगन की कोई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने फिर मामले को टालने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता के वकील ने इस अनुरोध का विरोध किया। यह याचिका शैलेंद्र सिंह की ओर से दायर की गई है। इसमें मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 24 मई को दी गई शिकायत का हवाला है। याचिका में सीबीआई या स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच की मांग की गई है।
आरोपों का विवरण :
याचिका में पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री के रिश्तेदार बताए जा रहे एक व्यक्ति पर आरोप हैं। उस पर झूठी शिकायतें और मामले दर्ज कराने का आरोप है। महिला सहयोगियों के माध्यम से लोगों को फंसाने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामलों को निपटाने के लिए बड़ी रकम मांगने का दावा भी किया गया है। संबंधित व्यक्ति के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों से करीबी संबंध होने का भी दावा है।
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जांच में देरी और अन्य पहलू :
शिकायत के साथ कथित बातचीत की ऑडियो और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री संलग्न होने का उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत की गंभीरता के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। शिकायत वापस लेने के लिए कथित दबाव और धमकी दिए जाने का दावा भी किया गया है। याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीश रणजीत सिंह के आरोपों का भी जिक्र है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 अगस्त को पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।
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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादियों की ओर से अब स्थगन की कोई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने फिर मामले को टालने का अनुरोध किया था। याचिकाकर्ता के वकील ने इस अनुरोध का विरोध किया। यह याचिका शैलेंद्र सिंह की ओर से दायर की गई है। इसमें मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 24 मई को दी गई शिकायत का हवाला है। याचिका में सीबीआई या स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच की मांग की गई है।
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आरोपों का विवरण :
याचिका में पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री के रिश्तेदार बताए जा रहे एक व्यक्ति पर आरोप हैं। उस पर झूठी शिकायतें और मामले दर्ज कराने का आरोप है। महिला सहयोगियों के माध्यम से लोगों को फंसाने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामलों को निपटाने के लिए बड़ी रकम मांगने का दावा भी किया गया है। संबंधित व्यक्ति के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों से करीबी संबंध होने का भी दावा है।
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जांच में देरी और अन्य पहलू :
शिकायत के साथ कथित बातचीत की ऑडियो और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री संलग्न होने का उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायत की गंभीरता के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। शिकायत वापस लेने के लिए कथित दबाव और धमकी दिए जाने का दावा भी किया गया है। याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीश रणजीत सिंह के आरोपों का भी जिक्र है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 अगस्त को पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी।