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Panchkula News: सेक्टर-19 के वेंडरों के लाइसेंस रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक

Sat, 01 Mar 2025 06:37 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Mar 2025 06:37 PM IST
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High Court stays cancellation of licenses of Sector-19 vendors
आदेश के खिलाफ अपील पर निर्णय लेने तक जारी रहेगी रोक
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वेंडरों की याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की सड़कों पर अपना व्यवसाय चलाने वाले स्ट्रीट वेंडरों के लाइसेंस रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोक तब तक जारी रहेगी जब तक कि स्ट्रीट वेंडर अपीलीय प्राधिकरण के पास नहीं जाते और याचिका पर निर्णय नहीं हो जाता।
स्ट्रीट वेंडरों ने इस आधार पर लाइसेंस रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी कि उन्हें मनमाने ढंग से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हुई और चंडीगढ़ स्ट्रीट वेंडर्स नियम, 2015 का उल्लंघन हुआ। याचिकाएं उन स्ट्रीट वेंडरों ने दायर की थीं, जिनका शुरू में सर्वेक्षण-पंजीकरण किया गया था व बाद में उन्हें वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। बाद में उन्हें सेक्टर-19 से दूसरे सेक्टरों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे कथित तौर पर उनकी आजीविका प्रभावित हुई। अधिकारियों को उनके अभ्यावेदन के बावजूद, कोई राहत नहीं दी गई और उनके वेंडिंग लाइसेंस रद्द कर दिए गए।
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याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के पास वेंडिंग लाइसेंस पर निर्णय लेने का अधिकार अतिरिक्त/संयुक्त आयुक्त को सौंपने का कोई अधिकार नहीं है। वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी करने, निलंबित करने या रद्द करने का अधिकार केवल टाउन वेंडिंग कमेटी के पास है।
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याचिका का विरोध करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि याचिकाकर्ता कई अवसरों के बावजूद वेंडिंग शुल्क का भुगतान करने में विफल रहे। चंडीगढ़ स्ट्रीट वेंडर्स रूल्स के अनुसार नगर आयुक्त टाउन वेंडिंग कमेटी के अध्यक्ष हैं और प्रशासनिक कर्तव्यों को संयुक्त आयुक्त को सौंपा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि वेंडिंग लाइसेंस रद्द करने के लिए टीवीसी सक्षम प्राधिकारी है और यह प्रक्रिया अतिरिक्त आयुक्त द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन अंततः टीवीसी द्वारा अनुमोदित की गई। चूंकि कारण बताओ नोटिस टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा पारित अंतिम आदेश में विलय हो गया है और याचिकाकर्ता के पास इसके खिलाफ वैधानिक अपील करने का उपाय है, इसलिए, याचिका में उठाई गई सभी शिकायतें संबंधित वैधानिक अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष उठाई जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए वेंडरों की अपील पर फैसला आने तक उनके लाइसेंस रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
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