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Panchkula News: कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी पर चुनाव ट्रिब्यूनल को हाईकोर्ट की फटकार
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्री मुक्तसर साहिब स्थित चुनाव ट्रिब्यूनल को तीखी फटकार लगाते हुए कहा है कि उसने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के फैसले में लापरवाह रवैया अपनाया और कानून में निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपनी मनमर्जी की प्रक्रिया बना ली।
जस्टिस पंकज जैन की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने दुर्भाग्यवश कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया की अनदेखी की और स्वयं की प्रक्रिया अपना ली। अदालत ने गंभीर प्रक्रिया संबंधी खामियों को उजागर करते हुए निर्णय की प्रति पंजाब के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए हैं ताकि उन्हें ट्रिब्यूनल के इस रवैये से अवगत कराया जा सके।
यह आदेश हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए जारी किया जिनमें 6 मार्च 2025 को ट्रिब्यूनल की ओर से पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में परगट सिंह बराड़ को हरिके कलां ग्राम पंचायत का निर्वाचित सरपंच घोषित किया गया था। अदालत ने उक्त आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुन: ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया और निर्देश दिया कि वह 27 अक्टूबर 2025 को सभी पक्षों की उपस्थिति में याचिका पर दोबारा विचार करे तथा कानून के अनुरूप मुद्दे तय कर सुनवाई करे।
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मामले के अनुसार पंचायत चुनाव 15 अक्टूबर 2024 को हुए थे जिनमें पांच उम्मीदवार मैदान में थे। गुरप्रीत सिंह को 2,842 वोटों से विजेता घोषित किया गया था। इस परिणाम को परगट सिंह बराड़ ने चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि गुरप्रीत सिंह एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराए जा चुके हैं इसलिए वह चुनाव लड़ने के अयोग्य थे। हालांकि सजा पर रोक थी, लेकिन दोषसिद्धि पर कोई स्थगन आदेश नहीं था। ट्रिब्यूनल ने बराड़ की याचिका स्वीकार करते हुए गुरप्रीत सिंह को अयोग्य ठहराया और बराड़ को निर्वाचित घोषित कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने यह आदेश बिना कानूनी आधार और बिना उचित प्रक्रिया के दिया है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल को चेताया कि भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत बनी रहें।
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्री मुक्तसर साहिब स्थित चुनाव ट्रिब्यूनल को तीखी फटकार लगाते हुए कहा है कि उसने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के फैसले में लापरवाह रवैया अपनाया और कानून में निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अपनी मनमर्जी की प्रक्रिया बना ली।
जस्टिस पंकज जैन की पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने दुर्भाग्यवश कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया की अनदेखी की और स्वयं की प्रक्रिया अपना ली। अदालत ने गंभीर प्रक्रिया संबंधी खामियों को उजागर करते हुए निर्णय की प्रति पंजाब के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए हैं ताकि उन्हें ट्रिब्यूनल के इस रवैये से अवगत कराया जा सके।
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यह आदेश हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए जारी किया जिनमें 6 मार्च 2025 को ट्रिब्यूनल की ओर से पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में परगट सिंह बराड़ को हरिके कलां ग्राम पंचायत का निर्वाचित सरपंच घोषित किया गया था। अदालत ने उक्त आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुन: ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया और निर्देश दिया कि वह 27 अक्टूबर 2025 को सभी पक्षों की उपस्थिति में याचिका पर दोबारा विचार करे तथा कानून के अनुरूप मुद्दे तय कर सुनवाई करे।
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मामले के अनुसार पंचायत चुनाव 15 अक्टूबर 2024 को हुए थे जिनमें पांच उम्मीदवार मैदान में थे। गुरप्रीत सिंह को 2,842 वोटों से विजेता घोषित किया गया था। इस परिणाम को परगट सिंह बराड़ ने चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि गुरप्रीत सिंह एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराए जा चुके हैं इसलिए वह चुनाव लड़ने के अयोग्य थे। हालांकि सजा पर रोक थी, लेकिन दोषसिद्धि पर कोई स्थगन आदेश नहीं था। ट्रिब्यूनल ने बराड़ की याचिका स्वीकार करते हुए गुरप्रीत सिंह को अयोग्य ठहराया और बराड़ को निर्वाचित घोषित कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने यह आदेश बिना कानूनी आधार और बिना उचित प्रक्रिया के दिया है। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल को चेताया कि भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत बनी रहें।