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Panchkula News: 25 साल से पेंशन मामले में जवाब नहीं दिया, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 2001 के पेंशन लाभ मामले में सरकारी सुस्ती पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने 25 साल से जवाब दाखिल न करने पर पंजाब सरकार को फटकार लगाई है। पहले एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के बावजूद जवाब न आने पर अब अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।
विष्णु दत्त और अन्य ने पेंशन संबंधी लाभों की दोबारा गणना और बढ़ोतरी के लिए याचिका दाखिल की थी। अदालत ने 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। याचिका 2001 में दाखिल हुई थी लेकिन सरकार ने इतने लंबे समय में लिखित जवाब नहीं दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि मामले के लंबित रहने के दौरान कई याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो गए। कुछ लोगों की मृत्यु भी हो गई और वे अपने वैध दावों पर फैसला नहीं देख सके। अदालत ने सरकारी रवैये को लापरवाह और असंवेदनशील बताया था। पहले एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था जिसे मुख्य सचिव केपी सिन्हा ने जमा कराया लेकिन प्रतिवादी संख्या तीन की ओर से अपेक्षित जवाब फिर भी दाखिल नहीं हुआ।
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अतिरिक्त जुर्माना :
मामला दोबारा सुनवाई के लिए पहुंचा तो अदालत ने अवहेलना जारी रहने पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निदेशक और विभाग के प्रमुख सचिव पर 50 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। यह राशि दोनों अधिकारियों के वेतन या पारिश्रमिक से बराबर-बराबर काटी जाएगी। इसे हाईकोर्ट बार क्लर्क एसोसिएशन में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव को निर्देश :
हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। उन्हें यह बताना होगा कि दोनों अधिकारियों के वेतन से 25-25 हजार रुपये काट लिए गए हैं। यह भी जानकारी देनी होगी कि निर्धारित स्थान पर राशि जमा करा दी गई है। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख बनाए रखा है।
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विष्णु दत्त और अन्य ने पेंशन संबंधी लाभों की दोबारा गणना और बढ़ोतरी के लिए याचिका दाखिल की थी। अदालत ने 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। याचिका 2001 में दाखिल हुई थी लेकिन सरकार ने इतने लंबे समय में लिखित जवाब नहीं दिया।
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अदालत ने टिप्पणी की कि मामले के लंबित रहने के दौरान कई याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो गए। कुछ लोगों की मृत्यु भी हो गई और वे अपने वैध दावों पर फैसला नहीं देख सके। अदालत ने सरकारी रवैये को लापरवाह और असंवेदनशील बताया था। पहले एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था जिसे मुख्य सचिव केपी सिन्हा ने जमा कराया लेकिन प्रतिवादी संख्या तीन की ओर से अपेक्षित जवाब फिर भी दाखिल नहीं हुआ।
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अतिरिक्त जुर्माना :
मामला दोबारा सुनवाई के लिए पहुंचा तो अदालत ने अवहेलना जारी रहने पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निदेशक और विभाग के प्रमुख सचिव पर 50 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया। यह राशि दोनों अधिकारियों के वेतन या पारिश्रमिक से बराबर-बराबर काटी जाएगी। इसे हाईकोर्ट बार क्लर्क एसोसिएशन में जमा कराने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव को निर्देश :
हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। उन्हें यह बताना होगा कि दोनों अधिकारियों के वेतन से 25-25 हजार रुपये काट लिए गए हैं। यह भी जानकारी देनी होगी कि निर्धारित स्थान पर राशि जमा करा दी गई है। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख बनाए रखा है।