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हरियाणा सूचना आयोग में रहा है सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों का वर्चस्व
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चंडीगढ़। हरियाणा सूचना आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों का वर्चस्व शुरू से ही रहा है। पहले आठ नौकरशाह इसमें सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में दो पूर्व आईएएस अधिकारी आयोग में शामिल हैं, जबकि अब दो और रिटायर्ड आईएएस विजय वर्धन और डॉ. एसएस फुलिया के आने से इनकी संख्या और बढ़ जाएगी।
नवंबर 2005 में जब हरियाणा सूचना आयोग की स्थापना हुई तो सर्वप्रथम प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव, जी. माधवन, रिटायर्ड आईएएस को प्रदेश का पहला मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया था। उनके बाद पूर्व मुख्य सचिव मीनाक्षी आनंद चौधरी, सेवानिवृत्त आईएएस एवं बाद में एक पूर्व वरिष्ठ आईएएस नरेश गुलाटी इस पद पर रहे। इसी बीच तत्कालीन दो सूचना आयुक्तों उर्वशी गुलाटी, रिटायर्ड आईएएस और जेएस कुंडू के पास भी कुछ समय के लिए मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यभार रहा। आज तक आयोग में कार्यकाल पूर्ण कर चुके 19 सूचना आयुक्तों में से 6 रिटायर्ड आईएएस मीनाक्षी आनंद चौधरी, आशा शर्मा, सज्जन सिंह, उर्वशी गुलाटी, समीर माथुर और शिव रमन गौड़ थे। इनके अलावा, आज तक एक रिटायर्ड आईपीएस प्रह्लाद राय मीणा, एक रिटायर्ड एचसीएस नरेंद्र सिंह यादव, तीन रिटायर्ड सेना अधिकारी जेबीएस यादव, जेएस कुंडू एवं केजी सिंह सूचना आयुक्त के पद पर रह चुके हैं। वर्तमान में 6 राज्य सूचना आयुक्तों में दो रिटायर्ड आईएएस चंद्र प्रकाश और ज्योति अरोड़ा शामिल हैं। इनके अतिरिक्त चार अन्य में अरुण सांगवान, कमलदीप भंडारी, जय सिंह बिश्नोई और पंकज मेहता हैं। 23 मार्च को ही निवर्तमान राज्य मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल, रिटायर्ड डीजीपी, का कार्यकाल पूर्ण हो गया है। इस पद पर रहने वाले इकलौते पूर्व आईपीएस हैं।
एडवोकेट ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लिखा पत्र
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लिखा है कि सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पद पर कार्यकाल पूर्ण होने के बाद उन पदों पर रह चुके पदाधिकारियों को आयोग में कार्यकाल के आधार पर जो पेंशन राशि हरियाणा सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, वह आरटीआई कानून के विरुद्ध है। क्योंकि कानून में राज्य सरकार द्वारा पूर्व राज्य मुख्य सूचना आयुक्तों और पूर्व राज्य सूचना आयुक्तों को आयोग में उनके कार्यकाल के बाद एवं उस आधार पर पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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नवंबर 2005 में जब हरियाणा सूचना आयोग की स्थापना हुई तो सर्वप्रथम प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव, जी. माधवन, रिटायर्ड आईएएस को प्रदेश का पहला मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया था। उनके बाद पूर्व मुख्य सचिव मीनाक्षी आनंद चौधरी, सेवानिवृत्त आईएएस एवं बाद में एक पूर्व वरिष्ठ आईएएस नरेश गुलाटी इस पद पर रहे। इसी बीच तत्कालीन दो सूचना आयुक्तों उर्वशी गुलाटी, रिटायर्ड आईएएस और जेएस कुंडू के पास भी कुछ समय के लिए मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यभार रहा। आज तक आयोग में कार्यकाल पूर्ण कर चुके 19 सूचना आयुक्तों में से 6 रिटायर्ड आईएएस मीनाक्षी आनंद चौधरी, आशा शर्मा, सज्जन सिंह, उर्वशी गुलाटी, समीर माथुर और शिव रमन गौड़ थे। इनके अलावा, आज तक एक रिटायर्ड आईपीएस प्रह्लाद राय मीणा, एक रिटायर्ड एचसीएस नरेंद्र सिंह यादव, तीन रिटायर्ड सेना अधिकारी जेबीएस यादव, जेएस कुंडू एवं केजी सिंह सूचना आयुक्त के पद पर रह चुके हैं। वर्तमान में 6 राज्य सूचना आयुक्तों में दो रिटायर्ड आईएएस चंद्र प्रकाश और ज्योति अरोड़ा शामिल हैं। इनके अतिरिक्त चार अन्य में अरुण सांगवान, कमलदीप भंडारी, जय सिंह बिश्नोई और पंकज मेहता हैं। 23 मार्च को ही निवर्तमान राज्य मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल, रिटायर्ड डीजीपी, का कार्यकाल पूर्ण हो गया है। इस पद पर रहने वाले इकलौते पूर्व आईपीएस हैं।
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एडवोकेट ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को लिखा पत्र
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को लिखा है कि सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के पद पर कार्यकाल पूर्ण होने के बाद उन पदों पर रह चुके पदाधिकारियों को आयोग में कार्यकाल के आधार पर जो पेंशन राशि हरियाणा सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, वह आरटीआई कानून के विरुद्ध है। क्योंकि कानून में राज्य सरकार द्वारा पूर्व राज्य मुख्य सूचना आयुक्तों और पूर्व राज्य सूचना आयुक्तों को आयोग में उनके कार्यकाल के बाद एवं उस आधार पर पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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