{"_id":"65baca05852f7faee50108e4","slug":"haryana-and-punjab-governments-should-ensure-compliance-with-the-provisions-to-prevent-cruelty-to-animals-high-court-pkl-office-news-c-16-1-pkl1041-341359-2024-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें हरियाणा व पंजाब सरकार: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करें हरियाणा व पंजाब सरकार: हाईकोर्ट
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पशु चिकित्सालयों व आश्रय स्थलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने व पशुओं के लिए शेल्टर इत्यादि की व्यवस्था को लेकर हरियाणा व पंजाब सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए इस बारे में लंबित याचिका का निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने भविष्य में भी प्रावधानों का पालन व मूलभूत सुविधाओं की कमी न हो यह सुनिश्चित करने का दोनों राज्यों को आदेश दिया है। साथ ही प्रावधानों के पालन को लेकर निश्चित अंतराल पर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
मोगलीऐड एनिमल वेलफेयर सोसाइटी चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पशु क्रूरता की रोकथाम नियम के अनुसार अस्पताल और पशु आश्रय के निर्माण के उद्देश्य से जिला सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) को पर्याप्त भूमि और अन्य सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है। पशुओं के लिए अस्पताल व आश्रय के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए एक पूर्णकालिक पशु चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों को उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। हाईकोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम नियम 2001 अधिसूचित होने के दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका सही पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में नियमों को सही ढंग से लागू करने की मांग की गई थी।
बीते तीन वर्षो में इन सुविधाओं के इंतजाम व पशु क्रूरता रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विभिन्न स्टेटस रिपोर्ट हरियाणा व पंजाब सरकार की ओर से दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने अब इन सभी को आधार बनाते हुए पाया कि अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। याची ने कहा कि अभी तो तय प्रावधानों के तहत कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन भविष्य में इससे दोनों राज्य पीछे हट सकते हैं। इस पर दोनों राज्यों ने विश्वास दिलाया कि इस मामले में कोई कोताही नहीं होगी। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और निश्चित अंतराल पर दोनों राज्यों को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोगलीऐड एनिमल वेलफेयर सोसाइटी चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पशु क्रूरता की रोकथाम नियम के अनुसार अस्पताल और पशु आश्रय के निर्माण के उद्देश्य से जिला सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) को पर्याप्त भूमि और अन्य सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है। पशुओं के लिए अस्पताल व आश्रय के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए एक पूर्णकालिक पशु चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों को उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। हाईकोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम नियम 2001 अधिसूचित होने के दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका सही पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में नियमों को सही ढंग से लागू करने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
बीते तीन वर्षो में इन सुविधाओं के इंतजाम व पशु क्रूरता रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विभिन्न स्टेटस रिपोर्ट हरियाणा व पंजाब सरकार की ओर से दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने अब इन सभी को आधार बनाते हुए पाया कि अब इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। याची ने कहा कि अभी तो तय प्रावधानों के तहत कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन भविष्य में इससे दोनों राज्य पीछे हट सकते हैं। इस पर दोनों राज्यों ने विश्वास दिलाया कि इस मामले में कोई कोताही नहीं होगी। ऐसे में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया और निश्चित अंतराल पर दोनों राज्यों को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
विज्ञापन