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Panchkula News: 72 करोड़ के एचएसवीपी गबन मामले में हरीश की अंतरिम जमानत खारिज
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सात दिन की जमानत मांगने वाले आरोपी ने भतीजे की मृत्यु के बाद धार्मिक रस्मों में शामिल होने की दी थी दलील
सुनवाई में मृतक के साथ रिश्ते को लेकर दावे पर उठे सवाल,
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के खातों से करीब 72 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में जेल में बंद आरोपी हरीश कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने उसकी सात दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने परिवार में मृत्यु के बाद होने वाली धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए जमानत मांगी थी। सुनवाई के दौरान मृतक के साथ उसके रिश्ते को लेकर याचिका में किए गए दावे पर सवाल उठे।
आरोपी ने अदालत में दलील दी थी कि 18 सितंबर को उसके सगे भतीजे की मृत्यु हुई है और 24 सितंबर को दिल्ली के सभापुर गांव में हवन-शांति समेत अन्य धार्मिक रस्में होनी हैं। उसने खुद को परिवार का मुख्य सदस्य बताते हुए इनमें शामिल होना जरूरी बताया था।
हालांकि, सरकारी वकील और जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मृतक आरोपी का सगा भतीजा नहीं है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने भी स्वीकार किया कि मृतक सगा भतीजा नहीं था। बचाव पक्ष का कहना था कि संयुक्त परिवार होने के कारण आरोपी धार्मिक रस्मों में शामिल होना चाहता है।
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गलत तथ्य पेश करने को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
अदालत ने कहा कि अंतरिम जमानत की अर्जी में मृतक के साथ वास्तविक रिश्ते को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने इस तथ्य को जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पर गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप हैं और मामले की जांच के मद्देनजर अंतरिम जमानत देने पर उसके फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
2015 से 2019 के बीच हुआ था कथित घोटाला
जांच के अनुसार, एचएसवीपी में वर्ष 2015 से 2019 के बीच फर्जी ई-मेल और बैंक खातों के माध्यम से करीब 72 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई थी। जांच में सामने आया कि रकम करीब 85 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। मामला सामने आने के बाद सेक्टर-7 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी हरीश कुमार को 14 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। वह तब से जेल में बंद है। मामले में पुलिस और जांच एजेंसी की ओर से आगे की जांच जारी है।
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सुनवाई में मृतक के साथ रिश्ते को लेकर दावे पर उठे सवाल,
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के खातों से करीब 72 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में जेल में बंद आरोपी हरीश कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। अदालत ने उसकी सात दिन की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने परिवार में मृत्यु के बाद होने वाली धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए जमानत मांगी थी। सुनवाई के दौरान मृतक के साथ उसके रिश्ते को लेकर याचिका में किए गए दावे पर सवाल उठे।
आरोपी ने अदालत में दलील दी थी कि 18 सितंबर को उसके सगे भतीजे की मृत्यु हुई है और 24 सितंबर को दिल्ली के सभापुर गांव में हवन-शांति समेत अन्य धार्मिक रस्में होनी हैं। उसने खुद को परिवार का मुख्य सदस्य बताते हुए इनमें शामिल होना जरूरी बताया था।
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हालांकि, सरकारी वकील और जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मृतक आरोपी का सगा भतीजा नहीं है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने भी स्वीकार किया कि मृतक सगा भतीजा नहीं था। बचाव पक्ष का कहना था कि संयुक्त परिवार होने के कारण आरोपी धार्मिक रस्मों में शामिल होना चाहता है।
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गलत तथ्य पेश करने को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
अदालत ने कहा कि अंतरिम जमानत की अर्जी में मृतक के साथ वास्तविक रिश्ते को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने इस तथ्य को जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पर गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप हैं और मामले की जांच के मद्देनजर अंतरिम जमानत देने पर उसके फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
2015 से 2019 के बीच हुआ था कथित घोटाला
जांच के अनुसार, एचएसवीपी में वर्ष 2015 से 2019 के बीच फर्जी ई-मेल और बैंक खातों के माध्यम से करीब 72 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई थी। जांच में सामने आया कि रकम करीब 85 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। मामला सामने आने के बाद सेक्टर-7 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी हरीश कुमार को 14 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था। वह तब से जेल में बंद है। मामले में पुलिस और जांच एजेंसी की ओर से आगे की जांच जारी है।