{"_id":"688d20ebb5d74000ed08b58f","slug":"ground-realitythe-school-neither-has-enough-rooms-nor-teachers-for-all-subjects-panchkula-news-c-87-1-pan1010-125325-2025-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: जमीनी हकीकत...स्कूल में न तो पर्याप्त कमरे हैं, न ही सभी विषयों के शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: जमीनी हकीकत...स्कूल में न तो पर्याप्त कमरे हैं, न ही सभी विषयों के शिक्षक
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। शहर के देवीनगर स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल की हकीकत सरकार के शिक्षा को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है। स्कूल में न तो पर्याप्त कमरे हैं और न ही सभी विषयों के शिक्षक। इतना ही नहीं बच्चों के लिए खेल का मैदान भी नहीं है। हालत यह है कि बच्चे जमीन पर दरियां बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक 401 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। एक कमरे में 40 बच्चों की बैठने क्षमता है, लेकिन यहां 85 बच्चों को बैठाया जा रहा है।
पहली से पांचवीं कक्षा तक के 138 बच्चों के लिए तो बेंच है, लेकिन 6वीं से आठवीं तक के 263 बच्चों के लिए बैंच नहीं है। स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। मजबूरी में एक ही कमरे में दो-दो कक्षाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे में बच्चों का ध्यान भटकता है और पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्कूल में केवल आठ शिक्षक, एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का जिम्मा
स्कूल में स्वीकृत पदों की तुलना में शिक्षकों की कमी है। अभी यहां आठ शिक्षक और तीन शिक्षकों की जरूरत है। एक प्राइमरी शिक्षक और मिडिल के लिए संस्कृत और सामाजिक शास्त्र जैसे विषयों के शिक्षक नहीं हैं। एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं का जिम्मा दिया गया है।
विज्ञापन
1975 प्राइमरी पाठशाला था, 1995 में मिडिल स्कूल का दर्जा मिला
यह स्कूल 1975 में प्राइमरी पाठशाला था। 1995 में इसे अपग्रेड करके मिडिल स्कूल का दर्जा दिया गया। इसकी देखरेख का जिम्मा शिक्षा विभाग के पास है। स्कूल में चार कमरे मिडिल क्लास के लिए और दो कमरे प्राइमरी के बच्चों के लिए हैं। शारीरिक विकास और मानसिक तनाव से राहत के लिए जरूरी खेल गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है। स्कूल में न तो बेंच-डेस्क हैं और न ही बैठने की उचित व्यवस्था। बच्चे तपती गर्मी में जमीन पर दरिया बिछाकर पढ़ते हैं।
ग्रामीण बोले- शिकायत के बावजूद नहीं होती सुनवाई
स्थानीय ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए सरकारी स्कूल में दाखिला करवाया था। लेकिन यहां तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
कोट...
राजकीय माध्यमिक विद्यालय देवीनगर में बच्चों के बैठने के लिए बेंच और नए कमरों के बनाने का प्रपोजल जल्द बनाया जाएगा। स्कूल की सारी व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से बजट मिलने के बाद जल्द काम करेंगे। -संध्या मलिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पंचकूला शिक्षा विभाग
विज्ञापन
पंचकूला। शहर के देवीनगर स्थित गवर्नमेंट मिडिल स्कूल की हकीकत सरकार के शिक्षा को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है। स्कूल में न तो पर्याप्त कमरे हैं और न ही सभी विषयों के शिक्षक। इतना ही नहीं बच्चों के लिए खेल का मैदान भी नहीं है। हालत यह है कि बच्चे जमीन पर दरियां बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक 401 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। एक कमरे में 40 बच्चों की बैठने क्षमता है, लेकिन यहां 85 बच्चों को बैठाया जा रहा है।
पहली से पांचवीं कक्षा तक के 138 बच्चों के लिए तो बेंच है, लेकिन 6वीं से आठवीं तक के 263 बच्चों के लिए बैंच नहीं है। स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। मजबूरी में एक ही कमरे में दो-दो कक्षाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे में बच्चों का ध्यान भटकता है और पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
विज्ञापन
स्कूल में केवल आठ शिक्षक, एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का जिम्मा
स्कूल में स्वीकृत पदों की तुलना में शिक्षकों की कमी है। अभी यहां आठ शिक्षक और तीन शिक्षकों की जरूरत है। एक प्राइमरी शिक्षक और मिडिल के लिए संस्कृत और सामाजिक शास्त्र जैसे विषयों के शिक्षक नहीं हैं। एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं का जिम्मा दिया गया है।
विज्ञापन
1975 प्राइमरी पाठशाला था, 1995 में मिडिल स्कूल का दर्जा मिला
यह स्कूल 1975 में प्राइमरी पाठशाला था। 1995 में इसे अपग्रेड करके मिडिल स्कूल का दर्जा दिया गया। इसकी देखरेख का जिम्मा शिक्षा विभाग के पास है। स्कूल में चार कमरे मिडिल क्लास के लिए और दो कमरे प्राइमरी के बच्चों के लिए हैं। शारीरिक विकास और मानसिक तनाव से राहत के लिए जरूरी खेल गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है। स्कूल में न तो बेंच-डेस्क हैं और न ही बैठने की उचित व्यवस्था। बच्चे तपती गर्मी में जमीन पर दरिया बिछाकर पढ़ते हैं।
ग्रामीण बोले- शिकायत के बावजूद नहीं होती सुनवाई
स्थानीय ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए सरकारी स्कूल में दाखिला करवाया था। लेकिन यहां तो बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
कोट...
राजकीय माध्यमिक विद्यालय देवीनगर में बच्चों के बैठने के लिए बेंच और नए कमरों के बनाने का प्रपोजल जल्द बनाया जाएगा। स्कूल की सारी व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से बजट मिलने के बाद जल्द काम करेंगे। -संध्या मलिक, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पंचकूला शिक्षा विभाग