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70 हजार प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार : पंधेर
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को 20 हजार प्रति एकड़ मुआवजा जारी किया है, जो काफी नहीं है। किसानों को 70 हजार प्रति एकड़ मुआवजा जारी किया जाना चाहिए। इसके साथ जिन किसानों की जमीन नदी में समा गई है उनको तुरंत मुआवजा जारी किया जाना चाहिए। पंधेर बुधवार को किसान भवन में मोर्चे की बैठक के बाद प्रेसवार्ता संबोधित कर रहे थे।
पंधेर ने कहा कि बिजली विभाग का निजीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका मोर्चे की तरफ से विरोध किया जाएगा। 27 अक्तूबर को किसान भवन में एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें इसके खिलाफ आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सभी बिजली कर्मचारियों यूनियनों को इस बैठक में आने का न्यौता दिया गया है। पंधेर ने गन्ना किसानों के अभी तक न बकाया न मिलने, मंडियों में धीमी गति से हो रहे धान के उठान, खाद की कमी और शंभू तथा खन्नौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान की भरपाई न होने पर गंभीर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पराली मुद्दे पर सरकारों की तरफ से दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है और सिर्फ किसानों को दोष दिया जा रहा है।
पंधेर ने हरियाणा पुलिस द्वारा किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की गिरफ्तारी की भी कड़ी निंदा। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है जबकि सरकार मंडियों में पूरे इंतजाम करने की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि चढूनी को तुरंत रिहा किया जाए और किसान आंदोलन पर दबाव डालने की सभी कोशिशें बंद की जाएं। साथ ही मोर्चे ने आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार द्वारा की गई आत्महत्या की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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चंडीगढ़। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को 20 हजार प्रति एकड़ मुआवजा जारी किया है, जो काफी नहीं है। किसानों को 70 हजार प्रति एकड़ मुआवजा जारी किया जाना चाहिए। इसके साथ जिन किसानों की जमीन नदी में समा गई है उनको तुरंत मुआवजा जारी किया जाना चाहिए। पंधेर बुधवार को किसान भवन में मोर्चे की बैठक के बाद प्रेसवार्ता संबोधित कर रहे थे।
पंधेर ने कहा कि बिजली विभाग का निजीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका मोर्चे की तरफ से विरोध किया जाएगा। 27 अक्तूबर को किसान भवन में एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें इसके खिलाफ आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सभी बिजली कर्मचारियों यूनियनों को इस बैठक में आने का न्यौता दिया गया है। पंधेर ने गन्ना किसानों के अभी तक न बकाया न मिलने, मंडियों में धीमी गति से हो रहे धान के उठान, खाद की कमी और शंभू तथा खन्नौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान की भरपाई न होने पर गंभीर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पराली मुद्दे पर सरकारों की तरफ से दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है और सिर्फ किसानों को दोष दिया जा रहा है।
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पंधेर ने हरियाणा पुलिस द्वारा किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी की गिरफ्तारी की भी कड़ी निंदा। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है जबकि सरकार मंडियों में पूरे इंतजाम करने की तरफ ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि चढूनी को तुरंत रिहा किया जाए और किसान आंदोलन पर दबाव डालने की सभी कोशिशें बंद की जाएं। साथ ही मोर्चे ने आईपीएस अधिकारी पूरण कुमार द्वारा की गई आत्महत्या की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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