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Panchkula News: सरकार अदालतों में पंजाबी भाषा के प्रयोग के लिए तैयार, लेकिन बुनियादी ढांचा उपलब्ध करवाने पर मौन
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चंडीगढ़। अंग्रेजी के स्थान पर पंजाबी को पंजाब की अदालती भाषा के रूप में लागू करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने याचिका को स्वीकार कर आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है। पंजाब के न्याय व गृह मामलों के विभाग की सचिव जसविंदर कौर सिद्धू ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के कानूनी और विधायी मामलों के विभाग द्वारा जारी 5 नवंबर, 2008 की अधिसूचना को पंजाब की अदालतों में लागू करने का निर्देश दिया जाए। पंजाब विधानसभा ने पंजाब में पंजाबी भाषा के कार्यान्वयन के लिए सर्वसम्मति से 2 मार्च, 2020 में आधिकारिक प्रस्ताव पारित कर इसकी सिफारिश की थी। सरकार भी चाहती है कि पंजाब के न्यायालयों में पंजाबी भाषा का प्रयोग कामकाज में हो। हालांकि इस जवाब में सरकार ने कहीं भी पंजाबी भाषा में सभी काम करने के लिए अपेक्षित बुनियादी ढांचा प्रदान करने के उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी है।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा और लुधियाना के मित्र सेन गोयल ने जनहित याचिका दायर कर पंजाब की जिला अदालतों में कामकाज पंजाबी भाषा में करवाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अपील भी की है कि 5 नवंबर, 2008 को अधिसूचित किए गए पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज (संशोधन) एक्ट 2008 के सेक्शन 3-ए के तहत यह अनिवार्य किया गया था कि उक्त नोटिफिकेशन लागू कर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के अधीन आने वाली पंजाब की सभी सिविल कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट के साथ ही रेवेन्यू कोर्ट, रेंट ट्रिब्यूनल व अन्य सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों में कामकाज पंजाबी में हो। कई वर्ष बीतने के बाद भी वैधानिक प्रावधान को लागू नहीं किया जा सका है, क्योंकि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार द्वारा 2008 के संशोधन के हिसाब से अदालतों को दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में सिविल प्रोसीजर कोड 1908 के सेक्शन 137 और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1973 के सेक्शन 272 का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि राज्य सरकार निचली अदालतों के लिए आधिकारिक भाषा का निर्धारण कर सकती है।
इससे पहले हाईकोर्ट के ओएसडी विजिलेंस ने जवाब दायर कर हाईकोर्ट को बताया था कि पंजाब में अदालतों में पंजाबी भाषा में काम करवाने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन पंजाब सरकार इसके लिए सहयोग नहीं कर रही है। हाईकोर्ट के बार-बार आग्रह के बाद भी पंजाब सरकार ने जिला अदालत न्यायिक अधिकारियों को पंजाबी भाषा के जानकार, ट्रांसलेटर, स्टेनो व अन्य स्टाफ उपलब्ध कराने में कोई रुचि नहीं दिखाइ। इसके कारण पंजाब की अदालतों में पंजाबी भाषा में कोर्ट का कामकाज संभव नहीं है।
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एडवोकेट एचसी अरोड़ा और लुधियाना के मित्र सेन गोयल ने जनहित याचिका दायर कर पंजाब की जिला अदालतों में कामकाज पंजाबी भाषा में करवाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अपील भी की है कि 5 नवंबर, 2008 को अधिसूचित किए गए पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज (संशोधन) एक्ट 2008 के सेक्शन 3-ए के तहत यह अनिवार्य किया गया था कि उक्त नोटिफिकेशन लागू कर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के अधीन आने वाली पंजाब की सभी सिविल कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट के साथ ही रेवेन्यू कोर्ट, रेंट ट्रिब्यूनल व अन्य सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों में कामकाज पंजाबी में हो। कई वर्ष बीतने के बाद भी वैधानिक प्रावधान को लागू नहीं किया जा सका है, क्योंकि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार द्वारा 2008 के संशोधन के हिसाब से अदालतों को दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में सिविल प्रोसीजर कोड 1908 के सेक्शन 137 और क्रिमिनल प्रोसीजर कोड 1973 के सेक्शन 272 का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि राज्य सरकार निचली अदालतों के लिए आधिकारिक भाषा का निर्धारण कर सकती है।
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इससे पहले हाईकोर्ट के ओएसडी विजिलेंस ने जवाब दायर कर हाईकोर्ट को बताया था कि पंजाब में अदालतों में पंजाबी भाषा में काम करवाने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन पंजाब सरकार इसके लिए सहयोग नहीं कर रही है। हाईकोर्ट के बार-बार आग्रह के बाद भी पंजाब सरकार ने जिला अदालत न्यायिक अधिकारियों को पंजाबी भाषा के जानकार, ट्रांसलेटर, स्टेनो व अन्य स्टाफ उपलब्ध कराने में कोई रुचि नहीं दिखाइ। इसके कारण पंजाब की अदालतों में पंजाबी भाषा में कोर्ट का कामकाज संभव नहीं है।
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