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Panchkula News: सरकारी खाते बने जालसाजों का एटीएम, फर्जी चेक और डेबिट नोट से उड़ाए करोड़ों

Sat, 11 Jul 2026 02:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:22 AM IST
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Government accounts become ATMs for fraudsters; crores siphoned off using fake cheques and debit notes.
590 करोड़ के घोटाले में सीबीआई चार्जशीट का खुलासा, बैंक सिस्टम की खामियों और अंदरूनी मिलीभगत पर उठे सवाल
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माई सिटी रिपोर्टर

पंचकूला। हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 शाखा में हुए कथित फर्जीवाड़े की परतें खोल दी हैं। जांच के अनुसार नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका के सरकारी खाते जालसाजों का एटीएम बन गए थे। फर्जी चेक, डेबिट नोट और बैंक के भीतर कथित मिलीभगत के सहारे करोड़ों रुपये निजी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किए गए।
चार्जशीट के मुताबिक नगर निगम पंचकूला का खाता 29 अक्तूबर 2025 को खोला गया था। 27 नवंबर को चेक नंबर 000006 के जरिए पहली बार 10 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके बाद 29 नवंबर, दो दिसंबर, छह दिसंबर और 12 दिसंबर को 10 से 20 करोड़ रुपये तक की कई बड़ी निकासी हुई। कुल 22 ट्रांजेक्शनों के जरिए सरकारी धन दुर्गा फूड्स, आर.के. एंटरप्राइज, त्रिपाठी फूड्स, गर्ग ओवरसीज समेत कई निजी फर्मों के खातों में भेजा गया।
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नगर परिषद कालका के खाते से भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। सीबीआई के अनुसार 20 जनवरी 2026 को फर्जी डेबिट नोट और अधिकारियों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर 18.46 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। यह रकम आरटीजीएस के माध्यम से मन्नत कांट्रैक्टर (5.92 करोड़ रुपये), दिशा ट्रेडर (6.92 करोड़ रुपये), एसआरआर प्लानिंग गुरुस (चार करोड़ रुपये) और दिव्या हाई-टेक बिल्ड केयर (1.62 करोड़ रुपये) के खातों में भेजी गई।
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चार्जशीट में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। ऑथराइजर सीमा धीमन पर बिना वास्तविक पुष्टि के ट्रांजेक्शन मंजूर करने, अनुज कौशल और कीर्तिश शर्मा पर फर्जी डेबिट एंट्री और दस्तावेज तैयार करने तथा सुधा गोयल पर कई ट्रांजेक्शनों और डेबिट नोट को मंजूरी देने के आरोप हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक (ऑपरेशन) दीपक कपूर से जांच एजेंसियों ने खाते खोलने से जुड़े मूल दस्तावेज जब्त किए हैं।


सीबीआई के अनुसार घोटाले का तरीका बेहद शातिर था। फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक, बैंक के जनरल लेजर (जीएल) खाते का इस्तेमाल कर सिस्टम अलर्ट से बचना और कई मामलों में बिना वास्तविक चेक के केवल फर्जी डेबिट नोट के आधार पर करोड़ों रुपये जारी करना इस पूरे फर्जीवाड़े का हिस्सा था।
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