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जनरल अस्पताल की इमरजेंसी में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं

Mon, 01 Aug 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला Updated Mon, 01 Aug 2016 01:09 AM IST
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 General hospital, emergency, security guard cheque patient blood pressure in panchkula hospital
पंचकूला अस्‍पताल - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल में इमरजेंसी विभाग की हालत दयनीय है। यहां पर वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। इस कारण इमरजेंसी में आने वाले हृदय रोग के मरीजों को पीजीआई (चंडीगढ़) रेफर कर दिया जाता है। ओटी में वेंटिलेटर की सुविधा है तो वह भी काफी दिनों से खराब पड़ा है।  
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मरीजों का सामान्य बीपी चेकअप जिस पर उसका पूरा इलाज टिका होता है। उसकी जांच अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात सिक्योरिटी गार्ड करते हैं। ऐसी स्थिति में हार्ट का मरीज अपनी परेशानी को लेकर इमरजेंसी में आता है तो उसकी जान भी जा सकती है।    
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बता दें कि अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों से ज्यादा मरीजों की बीपी चेक करते सिक्योरिटी गार्ड दिखते हैं। तस्वीरें इस सच्चाई को बयां कर रही हैं। अमर उजाला को सूचना मिली थी कि अस्पताल की इमरजेंसी में ब्लड प्रेसर चेक करने, इंजेक्शन और ड्रिप लगाने का काम सिक्योरिटी गार्ड भी करते हैं। 
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इसके बाद टीम ने तीन दिनों तक इस मामले की रियलिटी को चेक किया। इस दौरान यह हकीकत सामने आया। रविवार को दिन में करीब 12:45 बजे एक मरीज इमरजेंसी में पहुंचा। डॉक्टर ने इशारे पर मरीज की बीपी जांचने के लिए एक महिला सिक्योरिटी गार्ड पहुंच गई। जैसे ही उसकी तस्वीरें ली गईं तो उसने अपने हाथ ऊपर कर लिए और कहने लगी हमारी तस्वीर मत खींचिए। बात पीएमओ तक जाएगी तो डांट पड़ेगी। 

पांच रुपये में इलाज पार्किंग फीस दस रुपये 
जनरल अस्पताल में आने वाले मरीजों को तो मात्र पांच रुपये इलाज और मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत मुफ्त में दवाईयां दी जाती हैं। लेकिन यहां मरीजों पार्किंग फीस इलाज से ज्यादा वसूला जाता है। इलाज के लिए मरीज मात्र रुपये देते हैं और पार्किंग फीस उन्हें दस रुपये देने पड़ते हैं।   


इमरजेंसी गेट पर नहीं रहते मुलाजिम
जनरल अस्पताल के इमरजेंसी गेट से अक्सर फोर्थ क्लास मुलाजिम गायब रहते हैं। इलाज के लिए इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तीमारदार खुद स्ट्रेचर लेकर इमरजेंसी कक्ष तक अपने मरीज को पहुंचाते हैं। ऐसे में मरीज के तीमारदार कई बार परेशान होते हैं।

कोट्स 
ये बात मैं बिल्कुल नहीं मानती। ऐसा हो ही नहीं सकता। अगर ऐसा हुआ है तो इस मामले की जांच करूंगी। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है। 
- बीना सिंह, पीएमओ जनरल अस्पताल पंचकूला।
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